Tuesday, 24 March 2026

ममता बनर्जी की संभावनाएं ------ विजय राजबली माथुर

 

Friday, October 19, 2012

 "ममता बनर्जी के प्रधानमंत्री बनने की संभावनाएं ? "

उद्धृत लेख द्वारा मैंने स्पष्ट किया था :

पुराने अखबारों का अवलोकन करते समय सुश्री ममता बनर्जी की यह जन्मपत्री दिखाई दे गई जिसमे सन 2002 तक का उनका भविष्य लेखक ने अपनी थ्यौरी से दिया था। उसके सही-गलत होने की विवेचना मैं नहीं कर रहा हूँ। मैंने विगत विधानसभा चुनावों से पूर्व अपने एक लेख द्वारा ममता जी की कटु राजनीतिक आलोचना भी की थी और पश्चिम बंगाल की जनता से आह्वान भी किया था कि वह ममता जी को सत्तारूढ़ न होने दे। परंतु ममता जी मुख्यमंत्री बनी और बड़ी शान से बनीं। इसलिए भी कौतूहल था उनका भविष्य जानने का और इसलिए भी कि दार्जिलिंग ज़िले के सिलीगुड़ी मे 8वी कक्षा से 10वी बोर्ड की परीक्षा पास करने तक रहने के कारण बंगाल की राजनीति मे दिलचस्पी सदा ही रही है। वहाँ से 10-15 किलोमीटर दूर ही है नक्सल बाड़ी जहां 1967 मे 'नक्सल बाड़ी से नल बाड़ी तक' आंदोलन हमारे रहते ही शुरू हुआ था। इस आंदोलन का सम्पूर्ण लाभ राजस्थान के मारवाड़ियों को हुआ था जिनको इंश्योरेंस क्लेम नुकसान से कहीं बहुत ज़्यादा मिला था। अपनी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर आज भी मैं ममता जी का समर्थक नहीं हूँ,परंतु उनके ग्रह-नक्षत्र जो बोल रहे हैं उनको झुठलाया भी तो नहीं जा सकता। misuse of knowledge भी मैं नहीं कर सकता। अतः ममता जी की कुंडली का वैज्ञानिक निष्पक्ष  विश्लेषण प्रस्तुत करने मे कोई पूर्वाग्रह(IBN7 के प्रतिनिधि ब्लागर एवं उनकी  सहयोगी पूना प्रवासी ब्लागर की भांति जो ज्योतिष को मीठा जहर कहते हैं ) भी नहीं है। 


ममता जी की प्रस्तुत जन्मपत्री के अनुसार उनका जन्म लग्न-मकर है और---


द्वितीय भाव मे कुम्भ का 'मंगल'


पंचम भाव मे वृष का 'चंद्रमा'


षष्ठम भाव मे मिथुन का 'केतू'


सप्तम भाव मे कर्क का 'ब्रहस्पति'


दशम भाव मे तुला का 'शनि'


एकादश भाव मे वृश्चिक का 'शुक्र'


द्वादश भाव मे धनु के 'सूर्य','बुध' और 'राहू'


अखबारी विश्लेषण से अलग मेरा विश्लेषण यह है कि जन्म के बाद ममता जी की 'चंद्र महादशा' 07 वर्ष 08 आठ माह एवं 07 दिन शेष बची थी। इसके अनुसार 03 जूलाई 2010 से वह 'शनि'महादशांतर्गत 'शुक्र' की अंतर्दशा मे 03 सितंबर 2013 तक चलेंगी। यह उनका श्रेष्ठत्तम समय है। इसी मे वह मुख्य मंत्री बनी हैं। 34 वर्ष के मजबूत बामपंथी शासन को उखाड़ने मे वह सफल रही हैं तो यह उनके अपने ग्रह-नक्षत्रों का ही स्पष्ट प्रभाव है। 


इसके बाद पुनः 'सूर्य' की शनि मे  अंतर्दशा 15 अगस्त 2014 तक  उनके लिए अनुकूल रहने वाली है और लोकसभा के चुनाव इसी अवधि के  मध्य होंगे। केंद्र (दशम भाव मे )'शनि' उनको 'शश योग' प्रदान कर रहा है   

जो 'राज योग' है।


ममता जी को समयानुकूल सही बात कहने व उठाने का विलक्षण लाभ भी   उनके ग्रह प्रदान कर रहे हैं   

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आजकल इधर कई यू ट्यूब चेनल्स पर दिग्गज ज्योतिषी गण ' ममता बनर्जी ' के सत्ता वापसी को असंभव  बताते नहीं थक रहे है ऐसा  कर वे सत्तारूढ़ केंद्र सरकार से  पुरस्कार प्राप्त कर सकते हैं। 

मेरे अपने आँकलंन  के अनुसार ०६ फरवरी २०२६ से ०६ दिसंबर २०२८ तक ममता जी की बुध महादशान्तर्गत ' शुक्र' की अंतर्दशा चल रही है जो सुखदायक और श्रेष्ठ है उसके बाद भी ०९ मार्च २०३२ तक  ममता जी का समय लाभदायक,श्रेष्ठ और राज्य वृद्धिदायक होगा। अतः यदि व्यापक हेराफेरी ,धांधली और धूर्तता कामयाब न हो तो ममता जी की पुनः जीत अवश्य ही होगी। हम उनकी सफलता के लिए मंगलकामना करते हैं। 




Wednesday, 18 March 2026

युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं! ------ डा॰ गिरीश

 
साम्राज्यवादी युद्धोन्मादी अमेरिका और जियानवादी हिंसक इजरायल द्वारा ईरान पर थोपे गये अवांच्छित और विध्वंसकारी युद्ध की विभीषिका पर कालजयी शायर साहिर लुधियानवी की मशहूर नज्म आज और भी  प्रासंगिक बन पड़ी है। युद्ध के बारे में लिखी गयी इस नज्म का यद्यपि एक एक हरूफ़ सार्थक और सोद्देश्य है लेकिन ये चार पंक्तियाँ ही  युद्ध की समूची फिलास्फी को तार- तार  कर देती हैं-
जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है
जंग क्या मसअलों का हल देगी
 आग और ख़ून आज वख्शेगी
भूख और एहतियाज कल देगी
अमेरिका और इजरायल ईरान पर थोपे गये इस युद्ध को उचित ठहराने के जो कारण गिनाते रहे हैं वे तर्क की कसौटी पर कहीं भी खरे नहीं उतरते। वे कहते रहे हैं कि ईरान परमाणु बम बनाने जा रहा है। तो फिर सवाल उठता है कि आप कौन होते हैं उसे रोकने वाले। आप दोनों तो ख़ुद ही परमाणु हथियारों का भारी जखीरा लिये बैठे हैं। इजरायल ईरान का दसवां भाग भी नहीं है, लेकिन उसके गोदामों में भारी मात्रा में परमाणु अस्त्र- शस्त्र भरे पड़े हैं। वे प्रचारित करते हैं कि ईरानी परमाणु बम इजरायल और अमेरिका को बर्वाद करने को लक्षित हैं, तो फिर आप भी जबाव दीजिये कि आपके हथियार क्या शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिये हैं? क्या हथियारों के बल पर दुनियाँ में कहीं कोई शान्ति स्थापित हुयी है? दुनियाँ के किसी भी कोने में इतिहास में कोई एक भी उदाहरण मिलता हो तो बताइये जरूर।
फिर गत वर्ष भी आपने परमाणु हथियारों को विनष्ट करने का बहाना लेकर ईरान के संभावित परमाणु केन्द्रों पर B-2  जैसे घातक बमवर्षकों से हमला बोल दिया था और दावा किया था कि नाभिकीय ठिकानो, नाभिकीय ईधन और हथियारों को नष्ट कर दिया गया है। तो जबाव दीजिये कि दुनियाँ से आप तब झूठ बोल रहे थे या अब? क्या इससे साबित नहीं होता कि आप अपनी सनक,  अपनी हनक, अपनी अर्थव्यवस्था-- जो कच्चे- पक्के तेल और विनाशक हथियारों की तिजारत से फलफूल रही है की वासना के वशीभूत हो कर ही दुनियाँ के कोने कोने में युद्ध थोपते हैं और वहां लूटपाट कर निकल लेते हैं।
आपका दूसरा तर्क भी टिकाऊ नहीं है। दुनियाँ में लोकतन्त्र के स्वयंभू रक्षक बनने की हसरत पाले बैठे आपने दावा किया था कि आप ईरान की इस्लामिक तानाशाही  को समाप्त कर वहां लोकतन्त्र स्थापित करना चाहते हैं। आपने अपने इस उद्देश्य की पूर्ति के लिये पहले सत्ताविरोधी आंदोलन भड़काया जिसमें आपको असफलता हाथ लगी। फिर आपने शांति वार्ता का नाटक रचा और वार्ता के दरम्यान ही छलपूर्वक हमला कर सुप्रीमो अयातुल्लाह खोमेनी को उनके 44 साथियों सहित मार डाला। आपको लगा कि ईरान नेत्रत्वविहीन होगया और अब लोग सड़कों पर उतर आयेंगे। तब आप ईरान में अपनी कठपुतली सरकार बैठा देंगे। आपने ईरान को वेनेज्वेला समझने की भूल की और आपका यह सपना भी धरे का धरा रह गया।
आर्थिक- साम्राज्यवादी शोषण से संचित अपार धन संपदा आपके पास है, और दुनियाँ के सोने का बड़ा हिस्सा आपके गोदामों में भरा है। कहावत है कि ‘सर्व गुणा: कांचनम् आश्रयन्ति’ अर्थात सारे गुण सोने ( धन सम्पदा )  में निहित हैं। उसके  बल पर आपने विध्वंसकारी हथियार जुटाये हैं और पिट्ठू इजरायल के साथ मिल कर आपने ईरान के कोने कोने को ध्वस्त कर दिया। आप निरंतर जीत के ख्याली दावे कर रहे हैं । फिर यह विनाशक जंग क्यों जारी है आप जबाव नहीं दे पा रहे हैं। साफ है आपके पास हमले के लिये कोई वाजिब कारण था ही नहीं और अब जब इस महायुद्ध में गर्दन तक फंस गये हैं , उससे बाहर निकलने और नाक बचाने को आपको कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है। जो दुर्गति आपने अफगानिस्तान में झेली वही आप ईरान में झेलने जा रहे हैं। अब तो आप समझ ही गये होंगे कि हजारों साल पुरानी सभ्यतायें चन्द बमों से नष्ट नहीं की जा सकतीं।
आप और आपका देश मानवाधिकारों का पहरुआ बनने की कोशिशें करता रहा है। लेकिन इजरायल द्वारा गाजा में किये जा रहे नरसंहार को आपका निर्लज्ज समर्थन हासिल है। इस बीच आपको शांतिदूत बन कर नोबेल शान्ति पुरुष्कार पाने की सनक सवार है। एक उधार का नोबेल आप अपने गले में लटकाये घूम रहे हैं। आपके भारतीय मित्र भी इजरायल जाकर एक ऐसा ही फर्जी तमगा गले में डलवा कर आत्म संतुष्ट हैं। लेकिन 28 फरबरी को आपने एक बालिका विद्यालय  पर थोड़े अंतराल से दो बार बमबारी कराई ,जिसमें 168 निर्दोष बच्चियाँ और 14 अध्यापिकाएं शहीद हो गईं। आपको इस जघन्य अपराध के लिये क्षमा मांगनी चाहिये थी, लेकिन ढीढ़ता की सारी हदें पार करते हुये, आपने ईरान पर ही इसका आरोप जड़ दिया।
धनबल और शस्त्रबल में ईरान आपके सामने कहीं नहीं ठहरता, लेकिन जिस बहादुरी से वह इजरायल और अमेरिकी अड्डों को तवाह कर रहा है, वह इतिहास के स्वर्णिम दस्तावेजों में दर्ज हो रहा है। इससे न केवल आपकी बौखलाहट बढ़ी है, अपितु हताशा में आपने एक बार फिर ईरानी नेत्रत्व का संहार शुरू कर दिया। सामंतवादी युग में भी युद्ध के कुछ नियम थे लेकिन आधुनिकता और लोकतन्त्र का परचम लहराने का नाटक करते हुये आपने सारे संसार पर जंगल के कानून थोप दिये।
बक़ौल आपके आपने यह युद्ध आप द्वारा ख़ुद गड़े गये मुद्दों के हल के लिये शुरू किया था, लेकिन इसने आज अनेक मुद्दे खड़े कर दिये हैं।
किसी भी देश के भीतर सत्ता में बदलाव उस देश का निजी मामला होता है। उस देश की जनता का अधिकार है कि वह लोकतान्त्रिक तरीके से अपनी सरकार चुने। पर आपने तो सारी दुनियाँ में दखलंदाजी का ठेका ले रखा है। आपकी साजिशों में सहभागी इजरायल फिलिस्तीन, गाजा, लेबनान  और ईरान में वही सब कर रहा है। आपने वेनेज्वेला में कमांडो आपरेशन चला कर प्रेसीडेंट मादुरो और उनकी पत्नी का अपहरण कर उन पर अभियोग चलाया है। लेकिन एक संप्रभु देश की सीमाओं का अतिक्रमण कर वहाँ के राष्ट्राध्यक्ष के अपहरण का मुकदमा तो आप पर चलना चाहिए।
इराक, लीबिया और अब ईरान के नेत्रत्व को आपने जिस तरह बलात हलाक किया है, क्या इससे यौद्धिक हिंसा की नयी परंपरा कायम नहीं होगयी? यदि यही परंपरा दूसरे शक्तिशाली देश भी शुरू कर दिये तो बची खुची विश्व व्यवस्था भी तहस नहस हो जाएगी। आपकी मनमानी से संयुक्त राष्ट्र संघ और अंतराष्ट्रीय न्याय प्रणाली अंतिम साँसे गिन रहे हैं और बढ़ा प्रश्न खड़ा हो गया है कि अमेरिका- इजरायल को कौन युद्ध अपराधी घोषित करेगा? कौन उन्हें दंडित करेगा? आप सारी दुनियाँ को ईरान के खिलाफ बरगला कर विश्वयुद्ध भड़काना चाहते हैं। आप उन देशों का आह्वान कर रहे हैं कि वे अपनी सेनाएँ होरमुज भेजें जिनके कि जहाज वहाँ फंसे हैं।
आपके इस मनमाने कदम से विश्व अर्थव्यवस्था आज चरमरा कर रह गयी है। शिपिंग का खर्च 5 गुना बढ़ गया है। अकेले भारत का ही 12000 करोड़ का माल समुद्र में फंसा है। कच्चे तेल की कीमतें काबू के बाहर जा चुकी हैं। रसोई गैस की महंगाई और अनुपलब्धता ने घर और बाजार की व्यवस्था पर गहरी चोट की है। शेयर बाजार धड़ाम हो गये है। डालर के मुक़ाबले रुपया 92 के ऊपर हो गया है। आयात निर्यात में भारी गिरावट है। पेट्रोलियम पदार्थ आधारित उद्योग ठप पद चुके हैं। इसका प्रभाव अन्य उद्योगों पर साफ दिख रहा है। बेरोजगारी मेन बेपनाह बढ़ोत्तरी हुयी है। प्राक्रतिक और मानव निर्मित संपदाओं की बड़े पैमाने पर बरवादी हो रही है। पर्यावरण को अकल्पनीय क्षति पहुंची है। आप इन समूचे हालातों पर संवेदनशील और तार्किक रुख अपनाने के बजाए निरंतर उकसावे और विनाशकारी कारगुजारियों में जुटे हैं।
जंग खत्म करने के अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों की अनुपस्थिति में ईरान ने ही आगे बढ़ कर जंग खत्म करने की सशर्त पेशकश की है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने साफ कहा है कि अगर क्षेत्र में जारी तनाव और जंग को खत्म करना है तो पहले ईरान के अधिकारों को स्वीकार करना होगा। उन्होने कहा कि हालिया हमलों से हुये नुकसान की भरपाई की जाये और भविष्य में ईरान पर किसे तरह के हमले न हों, इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गारंटी दी जाये। तेहरान ने स्पष्ट किया है कि इन शर्तों के बिना स्थाई शांति संभव नहीं है।
विश्व जनमत को ईरान की इस पुकार को सुनना चाहिये और जंग जल्द से जल्द खत्म हो और प्रथ्वी इवान मानवता का भविष्य सुरक्षित हो सके। युद्ध किसी समस्या का समाधान न कभी हुआ है न होगा- साहिर की पंक्तियाँ
इसलिए ए शरीफ इन्सानों
जंग टलती रहे तो बेहतर है
आप और हम सभी के आँगन में
शम्मा जलती रहे तो बेहतर है।
डा॰ गिरीश।
18.3.2026.