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Sunday, 1 September 2019

भाकपा महासचिव डी. राजा द्वारा साम्प्रदायिक एजेंडे के खिलाफ संघर्ष के लिए एकजुटता का आह्वान ------ डॉ गिरीश



Girish CPI

7:09 PM (6 minutes ago)

लखनऊ 1 सितम्बर। भाकपा राज्य मुख्यालय पर आज प्रेस प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए भाकपा के नव निर्वाचित महासचिव डी. राजा, सांसद ने जम्मू एवं कश्मीर के बारे में बोलते हुए कहा कि उन्होंने दो बार राज्य का दौरा करने का प्रयास किया परन्तु दोनों बार भाजपा सरकार और राज्यपाल ने उन्हें हवाई अड्डे से बाहर नहीं जाने दिया और उन्हें हिरासत में लेकर वापस लौटने को मजबूर किया। हवाई जहाज में यात्रा कर रहे चन्द स्थानीय यात्रियों ने उन्हें बताया कि पूरे राज्य में हालात बहुत खराब है जबकि सरकार परिस्थितियों के सामान्य होने का दावा कर रही है। सह यात्रियों के अनुसार जीवन रक्षक दवाईयां, चिकित्सा सुविधायें तक आम नागरिकों को नहीं मिल रही है। तनाव के कारण बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं। उन्होंने सवाल खड़ा किया कि अगर स्थितियां सामान्य हैं तो उस राज्य के राजनैतिक नेताओं को रिहा क्यों नहीं किया जा रहा है और वहां पर आम नागरिकों का जीवन सामान्य क्यों नहीं किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 को समाप्त करने का कृत्य असंवैधानिक और गैर प्रजातांत्रिक है। संसद के बजट सत्र को लम्बा खीच कर सरकार ने 30 बिलों को बिना चर्चा किये और नियमों के खिलाफ जाकर अपने संख्या बल के आधार पर पारित करा लिया। यहां तक कि उस राज्य का केवल एक भाजपाई सांसद ही संदन में उपस्थित था और बाकी को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था। इस तरह संसद जैसी लोकतांत्रिक संस्थाओं का वजूद समाप्त करने और उन्हें बेमतलब कर देने के प्रयास चल रहे हैं। इस तरह प्रजातंत्र पर खतरा मंडरा रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि कश्मीर के विशेष प्राविधान केवल जम्मू एवं कश्मीर राज्य की जनता को ही नहीं प्राप्त हैं बल्कि देश के अन्य तमाम राज्यों को भी संविधान के अनुसार प्राप्त हैं। उसके दुष्परिणाम और बेचैनी देश के दूसरे भागों में भी दिखने लगी हैं। भारत राज्यों का एक गणतंत्र है और उस ढ़ाचे को ही समाप्त करने की साजिश चल रही है। सरकार ने कश्मीर की जनता, वहां के राजनैतिक नेताओं को विश्वास में लेने का प्रयास क्यों नहीं कर रही है और मानवीय मूल्यों की बर्बर हत्या कर रही है।

उन्होंने बसपा सुप्रीमों मायावती पर कश्मीर मामले में संविधान प्रारूप समिति के अध्यक्ष डा. अम्बेडकर को गलत तरीके से उद्घृत करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि डा. अम्बेडकर की सहमति से ही अनुच्छेद 370 संविधान में शामिल किया गया था। मूलतः डा. अम्बेडकर ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी और आरएसएस तथा हिन्दू महासभा की भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने की मांग को ठुकरा दिया था और उन्होंने भारत को धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और गणतंत्र बनाने का समर्थन किया था।

भाकपा महासचिव डी. राजा ने आसाम के एनआरसी का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे तरीकों से भाजपा और आरएसएस पूरे देश के माहौल को साम्प्रदायिक कर अपने पक्ष में ध्रुवीकरण के प्रयास कर रहे हैं। एनआरसी के प्रकाशन से कई तरह के सवाल पैदा हो गये हैं और सरकार उनके हल के कोई प्रयास नहीं करना चाहती। क्या होगा, यह अभी तक अनिश्चित है। सरकार को इस मामले पर भी राजनैतिक दलों के नेताओं को विश्वास में लेना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि आरएसएस प्रमुख आरक्षण पर बहस की मांग कर रहे हैं। पहले उन्होंने इस समाप्त करने की मांग की थी। आरएसएस शुरूआती दौर से दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों तथा महिलाओं को समाजिक न्याय का विरोध करती रही है। बहस का उनका मंतव्य मूलतः आरक्षण को समाप्त करवा देने का है। हालात यह है कि सरकारी नौकरियां उपलब्ध नहीं हैं, भर्ती नहीं की जा रही है और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का निजीकरण कर उनमें भी आरक्षण समाप्त किया जा रहा है। उन्होंने प्रश्न खड़ा किया कि कितने लोगों को आरक्षण का लाभ इस समय मिल पा रहा है? इस प्रकार मोदी सरकार आरएसएस के दिशानिर्देशन में उसकी हिन्दू राष्ट्र और पूजीपतियों के हितों को पूरा करने की दिशा में ही आगे बढ़ रही है।

भाकपा महासचिव ने कहा कि नोट बंदी और जीएसटी के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था गहरे संकट में फंस चुकी है। इन कदमों से अनौपचारिक क्षेत्र और छोटे एवं मध्य उद्योग पहले ही बर्बाद हो चुके थे। मोदी ने सत्ता में आने पर हर साल दो करोड़ रोजगार सृजित करने का वायदा किया था परन्तु वास्तविकता है कि साढ़े पांच साल के शासन में उन्होंने बेरोजगारी की दर को आजादी के बाद पहली बार चरम पर पहुंचा दिया है। कृषि पहले से ही घाटे का सौदा बन चुकी है। अर्थव्यवस्था को संभालने के बजाय सरकारी खर्चे के लिए सरकारी सम्पदाओं तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को निजी पूंजी के हाथों बेच रही है और भारतीय रिजर्व बैंक के रिजर्व को भी खाली कर दिया गया है। सरकारी बैंकों के विलय की घोषणा करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्वीकार किया कि आर्थिक मंदी के हालात हैं और भारतीय रूपया विश्व बाजार में अपनीे कीमत खोते हुए इस स्तर पर आ गया है कि 1 अमरीकी डालर को खरीदने के लिए आपको 72 से ज्यादा भारतीय रूपये खर्च करने पड़ रहे हैं। वे वादा करती हैं कि इससे निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा लेकिन आयात की कीमत हमें कितनी ज्यादा देने होगी, उसका जिक्र नहीं करती है।

बेपरवाह (reckless) विनिवेश की प्रक्रिया चल रही है और सकल उत्पादन जीडीपी भी अपने न्यूनतम स्तर पर है। औद्योगिक उत्पादन तो ऋणात्मक हो चुका है। अगर सरकार के आकड़ों को सही मान लिया जाये तो औद्योगिक उत्पादन की दर आधा प्रतिशत रह गयी है।

उन्होंने कहा कि बैंकों में बड़े पूजीवादी घरानों के ऋण एनपीए होते चले जा रहे हैं, लोगों को देश छोड़ कर भागने दिया गया। उन्होंने 10 सरकारी बैंकों का विलय कर 4 बैंक कर देने की भी निन्दा की कि इससे अंततः बेरोजगारी की गति और बढ़ेगी। उन्होंने सरकारी दावों पर प्रहार करते हुए कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की ऋण देने की क्षमता बढ़ाने का क्या उद्देश्य है? यह केवल बड़े पूंजीपतियों को और ऋण देने तथा पुराने एनपीए को बट्टे खाते डालने की साजिश के तौर पर किया गया है। इससे किसानों और छोटे व्यापारियों को तो सुविधायें नहीं बढ़ेंगी बल्कि शाखाओं के बंद होने के कारण और बेरोजगारी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि सरकार इस बात को याद रखने की कोशिश नहीं कर रही है कि 2008 की वैश्विक मंदी से भारत अगर बचा रहा था तो उसका एकमात्र कारण भारत का मतबूत सरकारी वित्तीय क्षेत्र था जिसे गर्त की ओर ढकेला जा रहा है।

भाकपा महासचिव डी. राजा ने सभी धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक शक्तियों का आवाहन किया कि वे आरएसएस/भाजपा के साम्प्रदायिक एजेंडे के खिलाफ संघर्ष के लिए एकजुट हों।

उत्तर प्रदेश के राजनैतिक परिदृश्य पर बोलते हुए भाकपा महासचिव डी. राजा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में घोर साम्प्रदायिक और अपराधियों को संरक्षण देने वाली नीतियों को लागू किये हुए जिसका परिणाम मॉब लिंचिंग, दलितों और आदिवासियों पर बढ़ते अत्याचार और बलात्कार के बाद हत्या की घटनाएं अपनी ऐतिहासिक ऊंचाईयों को छू चुकी है। पूरे प्रदेश में अराजकता का माहौल है। उन्होंने रविदास मंदिर, सोनभद्र, उन्नाव जैसी तमाम घटनाओं का उल्लेख किया।

एक प्रश्न के जवाब में होने कहा कि भाकपा उत्तर प्रदेश के उप चुनावों में 7-8 जगहों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी। एक दूसरे प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि नरेश अग्रवाल का विधायक पुत्र पार्टी बदल कर भाजपा में चला गया परन्तु न तो अखिलेश यादव ने विधान सभा अध्यक्ष को उसकी सदस्यता रद्द करने का पत्र भेजा और न ही विधान सभा अध्यक्ष ने इस बात का संज्ञान लिया। इसी तरह भाजपा के उन्नाव के विधायक की गिरफ्तारी पर उसे भाजपा से निष्कासित कर दिया परन्तु उसकी भी सदस्यता अभी तक समाप्त नहीं की गयी है।

भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पेट्रोल और डीजल पर वैट बढाने, बिजली दरों में प्रस्तावित बढ़ोतरी तथा गैस सिलेण्डरों की कीमत बढ़ाये जाने के खिलाफ भाकपा उत्तर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर 11 सितम्बर को धरने और प्रदर्शन आयोजित करेगी।
(डा. गिरीश)

राज्य सचिव

Wednesday, 10 July 2019

सुप्रसिद्ध पत्रकार व राजनीतिज्ञ कामरेड शमीम फ़ैज़ी को लखनऊ में श्रद्धांजली अर्पण ------ अरविंद राज स्वरूप



लखनऊ,9 जुलाई 2019
जानें मानें पत्रकार और नेता कॉम शमीम फ़ैज़ी को लखनऊ नें श्रधांजलि दी।

जानें मानें पत्रकार और सीपीआई के राष्ट्रीय सचिव मंडल के सदस्य कॉम शमीम फ़ैज़ी को कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य मुख्यालय पर श्रधांजलि दी गई।उनका निधन लम्बी बीमारी के बाद विगत 5 जुलाई को दिल्ली में हो गया था।सभा की अध्यक्षता राज्य सचिव डॉ गिरीश नें की,संचालन राज्य सह सचिव कॉम अरविन्द राज स्वरूप नें किया तथा दूसरे राज्य सहायक सचिव एवं पूर्व विधायक कॉम इम्तियाज़ अहमद नें शोक प्रस्ताव पेश किया।
कॉम इम्तियाज़ नें उनके बारे में बताते हुए कहा कि उनका जन्म 1946 में हुआ था और उनके पुरखे मऊ से महाराष्ट्र चले गये थे। वो अनेकों अखबारों में पत्रकार रहे।फिर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी में शरीक हुए।वो पार्टी के अंग्रेज़ी , न्यू ऐज अखबार के और उर्दू अखबार हयात के संपादक थे।उनका व्यक्तित्व सहज था।
अध्यक्ष डॉ गिरीश नें कहा राजनैतिक सम्बन्धों से व्यक्तिगत सम्बन्ध कब हो गए पता ही नहीं चला।वो पार्टी की शीर्षस्थ समिति के सदस्य थे, पार्टी के दस्तावेजों को स्पष्ट रूप से लिखते थे।पार्टी में यदि विचारों में मतभेद हुआ तो वो दोनों पक्षों को समझा सकते थे।बर्धन जी जैसे बड़े नेता भी उनकी प्रतिभा का लोहा मानते थे।उनके जानें से पार्टी की भारी क्षति हुई है लेकिन उनके विचारों का अनुसरण किया जाएगा।
संचालक कॉम अरविन्द राज स्वरूप नें कहा कि उनकी लेखनी विश्लेषणात्मक थी।उनोहने बताया कि उनके सम्बंध विद्यार्थी जीवन से थे।वो मास्टरपीस लेखक थे।उनोहने इस्लाम के धर्मावलंबियों पर जो पुस्तिका लिखी उसका कोई मुकाबला नहीं है।वो संस्कृति और साहित्य से गहराई से जुड़े थे ।बड़ी क्षति हुई है उनके जानें से।

इस अवसर पर इप्टा के राकेश नें उनके सांस्कृतिक योगदान का जिक्र किया। प्रलेस के वीरेंद्र यादव नें कहा कि उनोहने पीपीएच को पुनर्जीवित कर प्रगतिशील साहित्य के विस्तार में भारी योगदान दिया ,एटक के महेंद्र राय,महिला फेडरेशन की नेत्री आशा मिश्रा, नौजवान सभा के विनय पाठक ,प्रदीप घोष,ऋषि श्रीवास्तव,राम सोच यादव,देवेंद्र चौहान,ओ पी अवस्थी,ज्ञान शुक्ला,अनिल श्रीवास्तव,कल्पना पांडे आदि नें भी विचार रखे।
सभा के अंत मे 2 मिनट का मौन रखा गया और उनके परिवार के प्रति गहरी शोक संवेदनायें व्यक्त कीं।
सभा का अंत शमीम फ़ैज़ी..
अमर रहैं!! के नारे से सम्पन्न हुआ।
सभी उपस्थित जनों नें उनके चित्र पर पुष्प अर्पित किये।
https://www.facebook.com/arvindrajswarup.cpi/posts/2386233041594820

श्रद्धांजली सभा में खिलखिलाती हंसी !

Sunday, 5 May 2019

जनता से अपनी अदूरदर्शिता के कारण दूर हैं साम्यवादी दल ------ विजय राजबली माथुर


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उक्त बैठक में लखनऊ और वाराणासी की गठबंधन की ओर से महिला प्रत्याशियों को सांप्रदायिक भी बताया गया था जबकि हकीकत यह है कि दोनों स्थानों पर कांग्रेस प्रत्याशी ही सांप्रदायिक पृष्ठभूमी के हैं उनको समर्थन उनके ब्राह्मण होने के कारण दिया गया है जबकि दिल्ली में कामरेड बिरजू नायक द्वारा CPI, CPM और CPIML से संपर्क किए जाने के बावजूद उनके गैर - ब्राह्मण होने के कारण उनको समर्थन नहीं दिया गया है। 
यही वजह है कि ब्राह्मणवाद  से ग्रस्त होने के कारण साम्यवादी दल जनता से अलग - थलग हैं। 
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Thursday, 15 February 2018

लखनऊ भाकपा का 23 वां ज़िला सम्मेलन सम्पन्न

लखनऊ,15 फरवरी 2018 
आज भाकपा, लखनऊ का 23 वां ज़िला सम्मेलन 22, क़ैसर बाग स्थित पार्टी कार्यालय पर सम्पन्न हुआ। सम्मेलन का संचालन कामरेड ओ पी अवस्थी तथा अध्यक्षता कामरेड फूलचंद यादव,कामरेड आशा मिश्रा, कामरेड अशोक सेठ  आदि के एक अध्यक्ष मण्डल ने की। कामरेड अशोक मिश्रा,कामरेड डॉ गिरीश, कामरेड अरविंद राज स्वरूप की मंच पर विशेष उपस्थिती थी। 
जिलामंत्री कामरेड मोहम्मद ख़ालिक़ द्वारा तीन वर्षीय रिपोर्ट को सर्व - सम्मति से पारित किया गया। उनके द्वारा प्रस्तुत 21 सदस्यीय ज़िला काउंसिल,दो उम्मीदवार सदस्यों व पाँच विशेष आमंत्रित सदस्यों के पेनल को भी सर्व - सम्मति से स्वीकार किया गया। 
नव - निर्वाचित ज़िला काउंसिल की पहली बैठक कामरेड परमानंद की अध्यक्षता मे सम्पन्न हुई। इस बैठक में निवर्तमान ज़िला मन्त्री कामरेड मोहम्मद ख़ालिक़ ने नए जिलमंत्री के रूप में कामरेड परमानंद दिवेदी का नाम प्रस्तावित किया जिसे करतल ध्वनि के साथ सर्व - सम्मति से स्वीकार किया गया। कामरेड ख़ालिक़ के प्रस्ताव पर सहायक सचिव के रूप में कामरेड रामपाल गौतम व कामरेड राम इकबाल उपाध्याय, कार्यालय सचिव पद पर कामरेड ओ पी अवस्थी  एवं कोषाध्यक्ष पद पर कामरेड परमानंद को सर्व -  सम्मति से  निर्वाचित किया गया। 
नए जिलामंत्री कामरेड पी एन दिवेदी ने निवर्तमान जिला मंत्री कामरेड मोहम्मद ख़ालिक़ के सफल कार्यकाल की चर्चा की और कामरेड ख़ालिक़ ने अपने अनुभवों का उनको सहयोग देते रहने का आश्वासन दिया। दोनों सह - सचिवों ने भी कामरेड दिवेदी को पूर्ण सहयोग करने का आश्वासन दिया।
कामरेड मोहम्मद ख़ालिक़ के प्रस्ताव पर मुझे भी ज़िला काउंसिल में स्थान दिया गया है। मैंने जो अनुभव किया वह यह है कि, 21 सदस्यीय ज़िला काउंसिल में कम से कम 7 सदस्य ब्राह्मण हैं अर्थात 33 प्रतिशत और पदाधिकारियों में पाँच में से चार पदाधिकारी अर्थात 80 प्रतिशत ब्राह्मण हैं। सम्मेलन में पार्टी को जनता तक फैलाने के विचार प्रदेश सचिव डॉ गिरीश ने दिये थे किन्तु संगठन के ब्राह्मण वादी स्वरूप से जनता तक पार्टी की नीतियों के पहुँचने के आसार न के बराबर हैं। यदि प्रदेश व केंद्र में भी पार्टी नेतृत्व पर ब्राह्मण वादी वर्चस्व बना रहता है तब इसके जनता के बीच पकड़ बनाने की संभावनाओं को धक्का लगेगा। 1925 में स्थापित सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी होने के कारण ( राहुल गांधी वाली कांग्रेस का गठन 1969 में उनकी दादी इन्दिरा गांधी ने किया था जबकि, 1885 में स्थापित कांग्रेस 1977 में जनता पार्टी में विलीन हो चुकी है ) भाकपा को जो प्रथम आम चुनावों में मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी थी और केरल में लोकतान्त्रिक प्रक्रिया से सत्तारूढ़ रह चुकी है लोकप्रिय होने के लिए ब्राह्मण वाद के लबादे को उतार फेंकने की नितांत आवश्यकता है। अन्यथा जनता का विश्वास हासिल करना पार्टी के लिए टेढ़ी खीर रहेगा। कामरेड अरविंद राज स्वरूप द्वारा सम्मेलन में व्यक्त यह दृढ़ विश्वास कि, आगामी लोकसभा चुनावों में फासिस्ट भाजपा सरकार का पतन सुनिश्चित है तो ज़रूर सफल होगा परंतु उसका लाभ ब्राह्मण वाद की छाया से ग्रसित पार्टी को भी मिल सकेगा अथवा नहीं यह अनिश्चित है।  

Wednesday, 8 November 2017

वामपंथी पार्टियों द्वारा घोर जनविरोधी नोटबंदी की बरसी पर धरना ------ विजय राजबली माथुर







लखनऊ, 08 नवंबर 2017 : वामपंथी पार्टियों के देशव्यापी आह्वान पर मोदी सरकार द्वारा लागू की गई घोर जनविरोधी नोटबंदी की बरसी पर Cpi cpim ,cpiml , fb , suci की ओर से एक संयुक्त धरना विरोध दिवस के रूप में गांधी प्रतिमा , जी पी ओ , हज़रतगंज , लखनऊ पर  दोपहर 3 बजे से आयोजित किया गया जिसकी अध्यक्षता कामरेड मोहम्मद ख़ालिक़, जिलामंत्री भाकपा ने की। 
cpiml की ओर से कामरेड रमेश सेंगर व cpim की ओर से कामरेड प्रेम कुमार तथा अन्य वक्ताओं ने गत वर्ष की गई नोटबंदी से जनता, छोटे व्यापारियों, किसानों, मजदूरो, महिलाओं को होने वाले कष्टों पर विस्तृत चर्चा की। पंद्रह लाख लोगों की नौकरियाँ छूटने व सौ से अधिक लोगों की बैंकों की लाईनो में मौत की निंदा की गई। 
 Cpi के कामरेड विजय माथुर ने ज़िक्र किया कि, जर्मनी की चांसलर ने यू एस ए की ही प्रेस के हवाले से यह रहस्योद्घाटन किया था कि, भारत में की गई नोटबंदी अमेरिकी दबाव में की गई थी। वस्तुतः ओबामा साहब रिटायर होने वाले थे और यू एस ए में आठ नवंबर 2016 को अगले राष्ट्रपति चुनाव हेतु मतदान चल रहा था जिस दिन भारत में नोटबंदी का ऐलान किया गया। यू एस ए में डिजिटल कंपनियों का व्यापार चौपट हो चुका था और उनके बंद होने की नौबत आ रही थी लेकिन भारत की नोटबंदी ने उनका अस्तित्व बचा लिया क्योंकि यहाँ कैशलेस और डिजिटल लेन - देन के लिया जनता को बाध्य कर दिया गया था। पुराने बड़े नोट बैंकों में जमा हो चुके थे और नई करेंसी बाज़ार में आई नहीं थी।  उनका कहना था कि, जहां नोटबंदी से गरीब जनता कराह रही थी वहीं  बड़े कारपोरेट घराने मस्ती में अपना धंधा कर रहे थे।उनका दृष्टिकोण था कि नोटबंदी मोदी सरकार का देशद्रोही कदम था। इस सरकार के विरुद्ध जनता और व्यापारियों से टैक्स का भुगतान रोकने का आव्हान करना चाहिए तभी इस देशद्रोही सरकार को जनता की बात सुनने के लिए बाध्य किया जा सकेगा। 
अपने अध्यक्षीय भाषण में कामरेड ख़ालिक़ ने साथियों का आभार व्यक्त किया कि, उन्होने भारी संख्या में पहुँच कर कार्यक्रम को सम्पन्न करवाया जबकि पुलिस प्राशन निकाय चुनावों की आचार संहिता के नाम पर सभा ही नहीं होने देना चाहता था। उन्होने प्रिंट और एलेक्ट्रानिक मीडिया का भी धरने की रिपोर्टिंग करने व कवरेज के लिए धन्यवाद दिया। 

Monday, 3 July 2017

जनविरोधी, लोकतंत्र विरोधी सरकारों को उखाड़ फेंकने का काम सिर्फ छात्र-नौजवान ही कर सकते हैं ------ नितिन राज


Uma Raag



Uma Raag
०३-०७-२०१७ 
(उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पिछली 7 जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आइसा समेत कई संगठनों के छात्रों ने विरोध-प्रदर्शन किया था। इस मौके पर एक दर्जन से ज्यादा छात्रों और उनके नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया था। गिरफ्तारी के बाद इन सब पर गंभीर आपराधिक धाराएं लगा दी गयी थीं। निचली अदालत से जमानत खारिज होने के बाद तकरीबन तीन हफ्ते बाद इन नेताओं को ऊपरी अदालत से जमानत मिल पायी। लेकिन अभी भी आइसा के एक नेता नितिन राज को जमानत नहीं मिल सकी है। बताया जा रहा है कि इसके पीछे वजह पुलिस द्वारा मांगी गई घूस का न दिया जाना है। बाकी साथियों की रिहाई के बाद जेल में अकेले बंद नितिन राज ने एक पत्र जारी किया है। पेश है नितिन का पत्र।)

आज शायद भारतीय छात्र आन्दोलन अपने इतिहास के सबसे दमनात्मक दौर से गुजर रहा है, जहाँ छात्रों को अपनी लोकतान्त्रिक माँगों को लेकर की गई छात्र आन्दोलन की सामान्य कार्यवाही के लिए भी राजसत्ता के इशारे पर महीनों के लिए जेल में डाल दिया जा रहा है। छात्र आन्दोलन से घबराई योगी सरकार, जो कि इसे किसी भी शर्त पर कुचल देना चाहती है, हमें इतने दिनों तक जेल में रख कर हमारे मनोबल को तोड़ने की कोशिश कर रही है। लेकिन हम क्रान्तिकारी परम्परा के वाहक हैं हमारे आदर्श भगतसिंह और चंदू हैं, सावरकर नहीं, जो जेल के भय से माफ़ीनामा लिखकर छूटे और अंग्रेजों की दलाली में लग गए। हमें अगर और दिनों तक जेल में रहना पड़ा तब भी हम कमजोर पड़ने वाले नहीं हैं।
कल जब हमारे साथ के सभी आन्दोलनकारी साथियों की रिहाई हो गई और मेरी नहीं हुई तो पहले कुछ कष्ट हुआ लेकिन जब से पता चला कि मेरी रिहाई BKT थाने में हमारे साथियों द्वारा रिश्वत देने से इंकार करने के चलते रुकी है तब मुझे जानकर ख़ुशी हुई। यदि रिश्वत देकर मेरी रिहाई कल हो गई होती तो मैं छूट तो जाता परन्तु वो भ्रष्टाचार के खिलाफ आन्दोलन, जिसके चलते मैं जेल में आया, शायद हार जाता। जो कि इस आन्दोलन की मुख्य अंतर्वस्तु को ही भटका देता। मुझे गर्व है कि मैं भ्रष्टाचार के खिलाफ सही मायने में लड़ रहा हूँ और अपने सिद्धांतों के साथ खड़ा हूँ भले ही मुझे इसके लिए अधिक दिनों तक जेल में क्यों न रहना पड़ रहा हो। जेल में मैं बस हमारे प्रिय छात्रनेता चंद्रशेखर प्रसाद (चंदू) के शब्दों में “ यह मेरी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा है कि मैं चे ग्वेरा की तरह जियूँ और भगतसिंह की तरह मरूं”, को याद करके खुद को राजसत्ता के दमन से ज्यादा मजबूत पाता हूँ और लड़ने की एक नई ऊर्जा प्राप्त करता हूँ।
आज पूरे देश में जिस तरीके से कार्पोरेट फासीवादी ताकतों की सत्ता स्थापित है उसमें लगातार दलितों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं व अन्य वंचित तबकों पर हमले बढ़ रहे हैं। पूरे देश में एक ऐसी भीड़ पैदा की जा रही है जो सिर्फ अफवाह के चलते किसी की भी हत्या कर दे रही है। हमारे किसान जब अपने अधिकारों की मांग करते हैं तो उन्हें गोली से उड़ा दिया जा रहा है। अगर छात्र-नौजवान शिक्षा और रोजगार की बात करता है तो उसे जेल में ठूंस दिया जा रहा है, जो भी सरकार पर सवाल उठाता है उसे देशद्रोही करार दे दिया जाता है। इस भयानक दौर में मैं देश के सभी छात्र नौजवानों से अपील करता हूँ कि भगत सिंह के क्रांतिकारी विचारों से प्रेरणा लेते हुए समाज के सभी उत्पीड़ित तबकों को गोलबंद कर इन जनविरोधी, लोकतंत्र विरोधी सरकारों को उखाड़ फेंकने की जिम्मेदारी लें। ये काम सिर्फ छात्र-नौजवान ही कर सकते हैं।
अंत में मैं फिर इन सरकारों से कहना चाहता हूँ कि तुम्हारा कोई भी दमन और तुम्हारे भ्रष्टतंत्र की कोई भी बेशर्मी और बेहयाई क्रांतिकारी नौजवानों के मंसूबों को तोड़ नहीं सकती।
इंकलाब जिंदाबाद !!
नितिन राज
नेता, आइसा
जिला कारागार, लखनऊ
दिनांक-02.07.2017
https://www.facebook.com/umaip/posts/1345179175531029



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Sunday, 18 September 2016

कन्हैया कुमार का लखनऊ में आह्वान ------ विजय राज बली माथुर


फोटो सौजन्य से अरविंद राज स्वरूप 


आज दिनांक 18 सितंबर 2016 को चारबाग स्थित रवींद्रालय में AISF,AIYF,NFIW आदि-आदि कई संगठनों की ओर से एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता कामरेड डॉ गिरीश ने व  कुशल संचालन कामरेड अरविंद राज स्वरूप ने किया जिसके मुख्य वक्ता लोकप्रिय छात्र नेता कन्हैया कुमार रहे। 

IPTA के राष्ट्रीय महासचिव कामरेड राकेश ने AISF,AIKS और PWA के स्थापना सम्मेलनों की धरती लखनऊ आगमन पर कन्हैया कुमार का हार्दिक स्वागत किया। उन्होने कन्हैया को यह भी याद दिलाया कि उनका प्रिय गीत ' आज़ादी '  जिसे उन्होने अब राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बना दिया है के रचियता रवीद्र नगर इसी लखनऊ के ही थे और यह भी कि, उनके बेगूसराय में जब IPTA के कार्यक्रम में इस गीत को गाया गया था तब कन्हैया ने बाल कलाकार के रूप में उसमें भाग लिया था। 

शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने कन्हैया के संबंध में अपना यह शेर पढ़ा ---

किसी मासूम का अड़ियल रवैया ही यह काफी है 
बिहारी जाति का तो यह एक भैया ही अब काफी है 
तेरी कुर्सी के ढीले पेंच कसने के लिए दिल्ली में 
इस दौर का तो यह एक कन्हैया ही काफी है । 

खचाखच भरे हाल में लोग कन्हैया को सुनने के लिए आतुर थे और वे अन्य वक्ताओं की तकरीरों से काफी ऊब रहे थे । ऐसे माहौल में जब दिन के एक बज कर तेरह मिनट पर कन्हैया के भाषण की घोषणा की गई पूरे हाल ने करतल ध्वनि से अपने प्रिय युवा साथी के स्वागत में जोशीले नारों से हाल ही नहीं आस- पास के पूरे क्षेत्र को गुंजायमान कर दिया। जब कन्हैया ज़िन्दाबाद के नारे थमने का नाम नहीं ले रहे थे तब कन्हैया ने  01: 15 पर माईक संभालते  हुये लोगों से शांत रहने की अपील की उन्होने लोगों से कहा कि यह मोदी पद्धति है और उनको यह अच्छी नहीं लगती है अतः ऐसा न करा करें।लगभग 50 मिनट के अपने सम्बोधन में कन्हैया कुमार ने विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे और कहा कि वह समस्याएँ गिनवाने नहीं उनके समाधान के लिए जनता का सहयोग मांगने आए हैं। उन्होने कहा कि, यह उनकी दूसरी लखनऊ यात्रा है इससे पूर्व वह 2011 में AISF की 75 वीं वर्षगांठ में सम्मिलित होने के लिए आए थे। उनके भाषण की खास - खास बातें सार (संक्षेप ) रूप में प्रस्तुत हैं। 

कन्हैया कुमार ने कहा कि, गोष्ठियाँ समस्या का समाधान बताने के लिए की जानी चाहियें। जब समाधान की बात की जाएगी तब शासन - प्रशासन उत्पीड़न करेगा जिसका मुक़ाबला बिना वैचारिक प्रतिबद्धता के नहीं किया जा सकता है अतः इन गोष्ठियों के माध्यम से जनता को वैचारिक रूप से प्रतिबद्ध करने के प्रयास होने चाहिए। उन्होने यह भी कहा कि, उनको पत्रकारों पर गुस्सा नहीं बल्कि तरस आता है अपनी रोज़ी -रोटी के लिए नौकरी करने वाले पत्रकारों की नहीं उनके नियंताओं की आलोचना की जानी चाहिए और उनके चंगुल से पत्रकारों को स्वतंत्र कराया जाना चाहिए। 

आज देश का प्रधान मंत्री एक कंपनी का सिम बेचने के लिए माडलिंग कर रहा है और बातें स्टार्ट अप इंडिया की करता है। इंडिया का स्टार्ट अप सेलफ़ी से,अफ्रीका में ढ़ोल बजाने से, गुजरात में बर्थ डे केक काटने से नहीं होगा। किसान और बुनकर तथा मजदूर का उद्धार किए बिना इंडिया स्टार्ट अप नहीं हो सकता। हमको इसी तरह की जुमलेबाजी से ही आज़ादी चाहिए। मोदी देश नहीं,संघ संसद नहीं और मनु स्मृति संविधान नहीं है इनके खिलाफ बोलना देशद्रोह नहीं है। देश बाबा साहब अंबेडकर के संविधान के अनुसार प्रस्तावना में वर्णित ' हम भारत के लोग' हैं। जब तक संविधान के अनुसार हम लोगों को आज़ादी नहीं मिलती हम संघर्ष करते रहेंगे। इसके विपरीत आज के नौजवानों के दिमाग में मोदी-मोदी का एंथम बजाया जा रहा है हमें इससे आज़ादी चाहिए। 

कन्हैया ने कहा कि, आज़ादी से पहले हमारा संगठन AISF साम्राज्यवाद से आज़ादी के लिए लड़ रहा था आज हम उनके चेले - चपाटों के शोषण से आज़ादी के लिए लड़ रहे हैं। हमारे साथ आज़ादी के दीवाने निस्वार्थ लड़ रहे हैं । निश्चय ही संघिस्तान हारेगा और हिंदुस्तान जीतेगा। मोदी केवल मुसलमानों के खिलाफ द्वेष भड़का रहे  है उनको पता ही नहीं है कि कटिहार में मुस्लिम भी छठ पूजा करते हैं वह भारत की संस्कृति को जानते ही नहीं हैं और बात करते हैं भारतीय संस्कृति की। जब रोम  जल रहा था तो वहाँ का शासक नीरो बंसी बजा रहा था। आज कश्मीर से कन्या कुमारी तक हिंदुस्तान जल रहा है तब हमारा प्रधानमंत्री जन्मदिन का केक काट रहा है।

इंसान को मशीन बना दिया गया है , समवेदनाएं नहीं बची हैं। मध्यम वर्ग की दशा भी  सोचनीय है    :


आने वाले चुनावों में धर्म और जातिवाद नहीं साधारण जनता का मुद्दा होना चाहिए। आज समस्या सिर्फ गरीबों , किसानों, मजदूरों की ही नहीं है । आज समस्या उनकी भी है जो कारपोरेट की सेवा में लगे हैं। श्रम कानून कहता है कि, आठ घंटे काम करने बाद अगर अतिरिक्त काम लिया जाता है तो उस अतिरिक्त समय का दो गुना ओवर टाईम देना होगा लेकिन मोदी सरकार इन श्रमिक कानूनों को बदल कर कारपोरेट मालिकों को अपने कर्मचारियों के शोषण का लाईसेंस देने जा रही है। कारपोरेट घरानों, मीडिया आदि संस्थानों में सेवा करने वालों को 16-16 घंटे ड्यूटी करनी पड़ रही है जिसके लिए उनको कोई ओवर टाईम नहीं दिया जा रहा है। इंसान को मशीन बना दिया गया है , समवेदनाएं नहीं बची हैं। मध्यम वर्ग की दशा भी  सोचनीय है ।   नौकरी देने के नाम पर आज जो कंपटीशन हो रहे हैं वे लोगों को रिजेक्ट करने के लिए हैं । पढ़ाई भी केवल डिग्री खरीदने का साधन मात्र है, ज्ञान का नहीं। 
सरकारी पुलिस के लोग भी परेशान हैं। उन्होने एक उदाहरण देते हुये बताया कि उनके साथ चल रहे एक पुलिस अधिकारी ने उनसे कहा कि उनको बातें तो उनकी पसंद हैं लेकिन वह उनके साथ खड़े नहीं हो सकते। इस पर कन्हैया ने कहा कि वह अगर उनके साथ खड़े हो गए तो उनको लखनऊ से लखीमपुर खीरी ट्रांसफर कर दिया जाएगा, समस्या तो यह भी है। 

कन्हैया ने कहा कि, वर्तमान व्यवस्था से देश की बहुसंख्यक आबादी परेशान है। उदाहरण के लिए उन्होने बताया कि, FDI से सबका रोजगार छिनेगा चाहे वह धार्मिक अल्पसंख्यक हो चाहे धार्मिक बहुसंख्यक। 

समाधान : 

भाषण का समापन करते हुये कन्हैया कुमार ने समस्याओं के समाधान भी प्रस्तुत किए। उन्होने कहा कि, किसान का कर्जा माफ होना चाहिए जिससे उसे आत्म- हत्या न करनी पड़े। छात्रों को आर्थिक सहायता - वजीफा मिलना चाहिए जिससे किसी को बीच में पढ़ाई न छोडनी पड़े। बेरोजगारों को रोजगार या बेरोजगारी भत्ता देना चाहिए जिससे  लोग भूख से न मर सकें। 

उन्होने कहा कि ब्राह्मण वादी व्यवस्था आज राजनीति में चली गई है हमें इससे आज़ादी चाहिए। उन्होने कहा कि, ब्राह्मण होना अपराध नहीं है लेकिन यह सोचना कि, हमसे ऊपर कोई नहीं है यही ब्राह्मण वादी व्यसथा है जो अपराध है। उन्होने कहा कि जब शेख कहे कि, वह अंसारी में शादी नहीं कर सकता तो वह शेख ब्राह्मण वादी है। यादव ऐसा ही पटेल के लिए कहे तो वह यादव भी ब्राह्मण वादी है। आज राजनीति, अर्थ- व्यवस्था सभी जगह ब्राह्मण वाद है हमें इससे मुक्त होना होगा उसके बगैर समानता नहीं आ सकती। 

कन्हैया ने कहा कि, जब संविधान के अनुसार अंबानी और एक मोची का 'वोट' एक समान है तब दोनों का बच्चा एक ही स्कूल में क्यों नहीं पढ़ सकता? यह आज़ादी की लड़ाई अंबेडकर वाद और गोलवालकर वाद के बीच की लड़ाई है। इस लड़ाई में जीत अंबेडकर वाद की होगी। आर्थिक समानता और सामाजिक समानता की इस लड़ाई में ब्राह्मण वाद और जातिवाद बाधक है अतः उसके विरुद्ध शोषितों को एकजुट होना ही होगा और होंगे भी कन्हैया ने ऐसी आशा व्यक्त की। 

(कामरेड कन्हैया कुमार के विचार यू ट्यूब और फेसबुक पर सुनते - पढ़ते रहे हैं और उनको ब्लाग पर संकलित भी करते रहे हैं किन्तु प्रत्यक्ष रूप से  उनको देखने व सुनने का सुअवसर आज प्राप्त हुआ। जब कामरेड अरविंद राज स्वरूप ने मेरे द्वारा कन्हैया से भेंट करते समय कहा कि, यह माथुर साहब हैं और उस पर मैंने पूरा नाम बताया तो कन्हैया ने सहज आत्मीयता से कहा कि,' आप तो लिखते रहते हैं। ' इतनी लोकप्रियता, इतने ज्ञान और प्राप्त हो रहे सम्मान के बावजूद कन्हैया कुमार में अहं छू भी नहीं रहा है। हम उनके सुंदर,स्वस्थ,सुखद समृद्ध उज्ज्वल भविष्य एवं दीर्घायुष्य की मंगल कामना करते हैं। ------ विजय राजबली माथुर )



Video :

फोटो सौजन्य से प्रदीप घोष 


Pradeep Ghosh
धमनियों मे जुँबिश भर देने वाली कहानियों की रचयीता किरन सिंह की पहली कहानी संग्रह 'यीशू की कीलें' का लोकार्पण आज 16.9.2016 को रवीन्द्रालय लखनऊ में नयी पीढ़ी के युवा चिंतक अन्याय केे विरुध्द लड़ने वाले, दलितों , अल्पसंख्यकों , कामगार लोगों के पक्षधर कन्हैया कुमार (JNU) द्वारा किया गया :
https://www.facebook.com/pradeep.ghosh.7587/posts/558041457737095

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19 सितंबर 2016 

Sunday, 1 May 2016

लखनऊ में मई दिवस रैली व सभा

आज मई दिवस के शुभावसर पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के रस्ट्रीय सचिव कॉम. अतुल कुमार अंजान नगर निगम, लखनऊ , मज़दूरों को सम्बोधित करते हुए . 














लखनऊ, 01 मई 2016 :
आज साँय चार बजे से लखनऊ नगर निगम कार्यालय पर एटक,सीटू,एकटू, बैंक, बिजली, राज्य कर्मचारियों, प्राइवेट आटो चालक यूनियन, ई- रिक्शा यूनियन आदि के संयुक्त तत्वावधान में  एकत्र मजदूर साथियों  का मई जुलूस  प्रारम्भ हुआ जो जी पी ओ, हजरतगंज बाज़ार, लालबाग, होता हुआ वापस  नगरनिगम कार्यालय पर आकर सभा में परिवर्तित हो गया। 

जुलूस में शामिल अन्य लोगों के अतिरिक्त  अरविंद राज स्वरूप, आर एस बाजपेयी, चंद्रशेखर, रामेश्वर प्रसाद यादव,के के शुक्ल, ओ पी सिन्हा, रामचन्द्र, कल्पना पांडे, राम इकबाल उपाध्याय,  अकरम खान,शरीफ और  विजय माथुर भी रहे। 

सभा की अध्यक्षता सदरुद्दीन राणा ने की उनके साथ मंचासीन थे डॉ वी के सिंह,  सीपीआई एवं किसान सभा नेता कॉम अतुल कुमार अन्जान , अरविंद राज स्वरूप, आर एस बाजपेयी आदि। 

एटक संरक्षक एवं भाकपा, उ प्र के राज्य सह-सचिव कामरेड अरविंद राज स्वरूप ने अपने उद्बोद्धन द्वारा सभा का प्रारम्भ किया और 01 मई 1886 की  शिकागो की घटना का उल्लेख करते हुये मजदूरों की वर्तमान समस्याओं पर प्रकाश डालते हुये व्यापक मजदूर एकता की मांग उठाई। सीटू के प्रदेश अध्यक्ष आर एस बाजपेयी ने भी मज़दूर एकता का समर्थन करते हुये इसे आज की एक अनिवार्य आवश्यकता बताया। अन्य वक्ताओं ने भी इसी दिशा में अपनी बातें प्रस्तुत कीं। 
भाकपा के राष्ट्रीय सचिव व किसानसभा के राष्ट्रीय महासचिव कामरेड अतुल कुमार अंजान ने 1886 के शहीदों को श्रद्धा नमन करते हुये मजदूर साथियों को मई दिवस की शुभकामनायें दीं। साथ ही साथ उन्होने चेतावनी भी दी कि, यदि अब भी संगठित क्षेत्र के मजदूरों ने असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए संघर्ष नहीं किया तो धीरे-धीरे संगठित क्षेत्र समाप्त होता जाएगा और संविदा मजदूर उनका स्थान लेते जाएँगे और संगठित क्षेत्र का मजदूर भी जाति - धर्म के खेमों में बंट कर अपना अस्तित्व खोता  जाएगा। 2003 में बाजपेयी सरकार ने कर्मचारी पेंशन को समाप्त कर दिया था अब उसके बाद नियुक्त कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा समाप्त हो चुकी है। उनका कहना था कि न केवल मजदूरों वरन किसानों तथा खेत मजदूरों को भी एकजुट करना होगा और उनको वैज्ञानिक समाजवाद की ओर मोड़ने के लिए जाति वादी व सांप्रदायिक शक्तियों से संघर्ष करना होगा। विभिन्न मजदूर यूनियनों से शुरुआत करके सभी वैज्ञानिक समाजवाद समर्थक शक्तियों की एकता के बगैर जनता का जीवन निरंतर कष्टप्रद होता जाएगा। 

कामरेड अंजान के उद्बोधन के बाद इप्टा कलाकारों ने कामरेड उदयवीर सिंह के निर्देशन में नाटक 'अच्छे दिन' की सराहनीय प्रस्तुति की। नाटक के बाद सदरुद्दीन राणा साहब ने सभा समापन की घोषणा की। 



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Wednesday, 4 November 2015

जनता के मर्म को समझने वाले एक जन-प्रिय नेता : कामरेड अतुल अनजान ------ विजय राजबली माथुर



(Atul Kumar Anjaan recently was invited by Miss Rolene Strauss- MISS WORLD 2014 
both had a conversation on current issues..... had a great conversation with her... I also had an opportunity to meet Miss Carina Tyrrell - MISS ENGLAND 2014 and Miss Aditi Arya - MISS INDIA 2015
earlier I was having inmpression that these are only beautiful girls but I found they are just only not beautiful but they are so intelligent and intellectually sound too..)
https://www.facebook.com/atul.anjaan.9/timeline/story?ut=43&wstart=0&wend=1448956799&hash=3772699294389714288&pagefilter=3&pnref=story
अखंड आत्म भाव जो असीम विश्व में भरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।
                                  (मैथिलीशरण गुप्त )


अहंकार से कोसों दूर हैं कामरेड अतुल अनजान साहब और इसी वजह से जनता व कार्यकर्ताओं के दिलों में उनके लिए जो जगह है उसे कोई छीन नहीं पाता है। 'खिसियानी बिल्ली खंबा नोचे' की तर्ज़ पर कुछ सिरफिरे या हकीकत में बाजारवादी/ब्राह्मणवादी और अश्लीलता समर्थक वामपंथियों ने उनके व्यक्तित्व  पर एक नहीं अनेकों बार निजी हमले किए हैं। किन्तु वह पूर्ण समर्पण भाव से अपने कर्म में लगे रहते हैं और निंदकों पर जवाबी प्रहार किए बगैर ही आगे बढ़ते रहते हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि वह अपनी निजी चिंता किए बगैर जन-सेवा में लगे रहेंगे। अभी बिहार के चुनावों में भी उन्होने बावजूद अस्वस्थता के काफी सक्रिय भाग लिया है।वामपंथी होते हुये भी जिन अदूरदर्शी जनों ने उन पर अनर्गल, अवांछनीय और आधारहीन आरोपों की बौछार की उनके संबंध में भी उनका सिर्फ इतना ही कहना है की, 'दुश्मनी करो लेकिन इतनी भी नहीं कि फिर दोस्ती होने पर शर्मिंदा होना पड़े '।   

कामरेड अतुल अनजान लखनऊ विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष और AISF के भी पूर्व अध्यक्ष तो हैं ही। वर्तमान में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के 'राष्ट्रीय सचिव' तथा AIKS-अखिल भारतीय किसानसभा के 'राष्ट्रीय महामंत्री हैं'।  न केवल अपनी ओजस्वी वाक-शैली वरन जनता के मर्म को समझने वाले एक जन-प्रिय नेता के रूप में भी जाने जाते हैं। 

यदि भाकपा केंद्रीय नेतृत्व उनके राष्ट्रीय कृत्यों के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश में पार्टी के पथ -प्रदर्शक के रूप में उनको अतिरिक्त भार  दे दे  तो पार्टी को अत्यंत लाभ हो सकता है।  
http://communistvijai.blogspot.in/2013/12/blog-post_24.html
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Monday, 5 October 2015

उत्पीड़न,मंहगाई व सूखा तथा दादरी कांड के खिलाफ लखनऊ में आंदोलन






 भाकपा,लखनऊ के जिलामंत्री द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार आज दिनांक 05 अक्तूबर 2015 को राष्ट्रीय आव्हान पर जिलामंत्री कामरेड मोहम्मद ख़ालिक़ के नेतृत्व में मोदी सरकार की आम जनता पर कमर तोड़ आर्थिक बोझ लादने वाली कारपोरेट समर्थक जनविरोधी नीतियों के प्रतिरोध स्वरूप 'मंहगाई दिवस' के रूप मनाया गया व राष्ट्रपति को संबोधित एक सात सूत्रीय ज्ञापन जिलाधिकारी, लखनऊ के माध्यम से सौंपा गया। 
ज्ञापन द्वारा बेतहाशा बढ़ती मंहगाई,पार्टी कार्यकर्ताओं का अजय सिंह, का सागर सिंह, का नरेश चन्द्र,का राम निवास जोशी  पर अमरोहा व बिजनौर में किए गए पुलिस ज़ुल्म और तमाम गंभीर धाराओं में निरुद्ध किए जाने को गलत ठहराया गया है व उनके बिना शर्त रिहा किए जाने की मांग की गई है। प्रदेश में समान शिक्षा दिये जाने व अनुसूचित जाति एवं भूमि हड़पने जैसा कानून निरस्त करने तथा गौतम बुद्ध नगर -दादरी (बिसाहड़ा ) में सांप्रदायिक ताकतों द्वारा मिथ्या आरोप पर असामाजिक तत्वों द्वारा  बेगुनाह की हत्या करने वालों पर रासुका लगा कर गिरफ्तार किए जाने की मांग की गई है। ई-रिक्शा चालकों के हो रहे उत्पीड़न को भी बंद किए जाने की मांग उठाई गई है। 
ज्ञापन देने जाने वालों में प्रमुख रूप से सर्व कामरेड मोहम्मद ख़ालिक़, मधुराम मधुकर, परमानंद दिवेदी, मोहम्मद अकरम, राम देव तिवारी, हरिहर प्रसाद गुप्ता, शरीफ, विजय माथुर,  डॉ संजीव सक्सेना, रूप नारायण आदि शामिल थे। 

गांधी प्रतिमा, जी पी ओ पार्क पर वाम  मोर्चे द्वारा दादरी कांड पर संयुक्त धरना :

छह वामपंथी दलों ने संयुक्त रूप से दादरी कांड पर दोपहर दो बजे से धरना दिया। लगभग सभी वक्ताओं ने पीड़ित परिवार को सुरक्षा व दोषियों को कडा दंड देने की मांग की। महिला नेता  कामरेड ताहिरा हसन ने सांप्रदायिक शक्तियों के विरुद्ध जनता की लामबंदी की बात रखी जबकि भाकपा, लखनऊ के जिलामंत्री कामरेड मोहम्मद ख़ालिक़  ने आने वाले समय की कठोर चुनौतियों से वाकिफ कराया। उनका सुदृढ़ अभिमत था कि अब समय आ गया है कि हमको इन सांप्रदायिक शक्तियों से मुक़ाबला करने के लिए खुद को संगठित करना होगा और उनको मुंहतोड़ जवाब देना होगा। 
इस संयुक्त धरने में भाकपा की ओर से जिलामंत्री कामरेड मोहम्मद ख़ालिक़ के अतिरिक्त परमानंद दिवेदी, विजय माथुर और डॉ संजीव सक्सेना शामिल हुए । 

Saturday, 15 August 2015

'देश की तस्वीर' : एक चर्चा स्वतन्त्रता दिवस पर भाकपा,लखनऊ द्वारा --- विजय राजबली माथुर



 लखनऊ, 15 अगस्त 2015 : आज प्रातः 10,30 पर पार्टी कार्यालय, 22 क़ैसर बाग परिसर में राष्ट्र ध्वज का आरोहण वयोवृद्ध कामरेड मुख्तार साहब के कर कमलों से सम्पन्न हुआ। राष्ट्र गान के पश्चात जिलामंत्री कामरेड मोहम्मद ख़ालिक़ द्वारा उपस्थित सभी जनों को मिष्ठान्न वितरण किया गया। इसके उपरांत सभागार में एक गोष्ठी 'देश की तस्वीर' विषय पर आयोजित की गई जिसकी अध्यक्षता कामरेड कनहाई राम जी ने व संचालन कामरेड मोहम्मद ख़ालिक़ ने किया।गोष्ठी - सभा के प्रमुख वक्ताओं में सर्व कामरेड मधुकर मदुराम, परमानंद दिवेदी, बाल गोविंद, अमर, राम पाल गौतम, रामदेव तिवारी, मोहम्मद अकरम खान, राम इकबाल उपाध्याय, शकिर, कल्पना पांडे, एननूद्दीन, शिवानी, कांति मिश्रा, आशा मिश्रा, विजय माथुर, मोहम्मद ख़ालिक़ तथा कनहाई राम जी  एवं दो अन्य साथी रहे। 

प्रारम्भ में जिलामंत्री कामरेड मोहम्मद ख़ालिक़ ने बताया कि झन्डारोहण तो पार्टी कार्यालय में पहले भी होता रहा है किन्तु इस प्रकार की विचार गोष्ठी का आयोजन पहली बार किया जा रहा है और इसका कारण यह है कि हम जनता की इस निर्मूल धारणा को बदलना चाहते हैं कि कम्युनिस्ट पार्टी विदेश से प्रेरित है । उन्होने ज़ोर दे कर कहा कि हमारे कार्यकर्ताओं को दृढ़तापूर्वक जनता को समझाना चाहिए कि हम कम्यूनिस्टो ने देश की आज़ादी के लिए बड़ी-बड़ी कुर्बानियाँ दी हैं तथा जन सरोकार से जुड़े हर मुद्दे पर आज भी संघर्ष में सबसे आगे रहते हैं। बावजूद इसके अनेकों वक्ताओं ने विषय से हट कर केवल स्थानीय या व्यक्तिगत मुद्दों पर ही चर्चा की। सबसे पहले कामरेड राम इकबाल उपाध्याय ने ध्यान आकृष्ट किया कि कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापकों में से एक एम एन राय एक बड़े क्रांतिकारी भी थे।उनकी बात का समर्थन कांति मिश्रा जी ने भी किया और आशा मिश्रा जी ने तो विषय की विशद चर्चा करते हुये तमाम क्रांतिकारियों का नामोल्लेख करते हुये बताया कि उनका संबंध कम्युनिस्ट पार्टी से रहा है । इसी क्रम में  कुछ साहित्यकारों की भूमिका की चर्चा करते हुये उनको भी कम्युनिस्ट पार्टी से सम्बद्ध बताया। उनका कहना था कि आज़ादी से पहले और आज भी कम्युनिस्टो का मुख्य संघर्ष सांप्रदायिक शक्तियों से रहा है। हम लोगों के कमजोर पड़ने से आज सांप्रदायिक शक्तियाँ सत्ता में हैं उन्होने आह्वान किया कि हमें एक जुट होकर उनको उखाड़ फेंकना होगा। 
विशेष उल्लेखनीय वक्तव्य युवा कामरेड शिवानी का रहा जो अपने पिता मधुकर मदुराम की तुलना में भी श्रेष्ठ बोलीं और जिलमंत्री महोदय को टिप्पणी करनी पड़ी कि बच्चा होकर 'दादी' की तरह बोली। मज़ाक-मज़ाक में जब आशा मिश्रा जी ने कहा कि आप 'दादी' शब्द को वापिस लें तो उनका कहना था कि यह शब्द इसलिए वापिस नहीं लिया जा सकता क्योंकि उनकी ओर से यह आशीर्वाद है  क्योंकि शिवानी ने पूरी परिक्वता का परिचय दिया है जबकि पुराने लोग भी उतना ध्यान नहीं दे पाते हैं । उन्होने नए लोगों से उम्मीद की कि वे शिवानी से प्रेरणा लेंगे। शिवानी के वक्तव्य में खास ज़ोर  इस बात पर था कि हमारे पूर्वजों ने जो कुर्बानी दी थी उसी का नतीजा है कि हम आज आज़ाद हैं और पूरी स्वतन्त्रता से अपनी बात रख पा रहे हैं। अतः आज़ादी को आधा-अधूरा न कह कर उसकी रक्षा की ओर सन्नद्ध होना चाहिए। पार्टी को कैसे मजबूत किया जाये इस विषय पर भी शिवानी ने अपनी बेबाक राय रखी। उनका खास तौर पर  कहना था हमें जनता के बीच जाकर उसकी बात सुनना चाहिए। 
कामरेड ख़ालिक़ ने अपनी इस टिप्पणी के साथ कि अब तक सबकी राय को लेखनीबद्ध कर रहे विजय माथुर को अब हम सुनना चाहते हैं बोलने को कहा। जबकि सुनने के उपरांत उनकी टिप्पणी थी कि बड़ी समझदारी के साथ विजय माथुर ने उत्तेजित कर दिया है हो सकता है उनका अंदाज़ सही हो कि जब हम सब विफल हो जाएँ तो युवा वर्ग क्रांति का मार्ग अपना ले और आगे बढ़ जाये। 
विजय माथुर ने अपनी बात की शुरुआत 15 अगस्त 1947 के भारत/पाक विभाजन से की और बताया कि इसे 'सांप्रदायिक विभाजन' की संज्ञा दी जाती है जबकि यह 'साम्राज्यवादी विभाजन' था। वस्तुतः सांप्रदायिकता साम्राज्यवाद की ही सहोदरी है। विभाजन का फार्मूला व्हाइट हाउस में तय किया गया था जिस पर अमल ब्रिटिश सरकार ने किया। क्योंकि अंग्रेजों ने सत्ता मुगलों से हासिल की थी इसलिए शुरू-शुरू में मुसलमानों को कुचला गया था किन्तु 1857 की क्रांति का नेतृत्व बहादुर शाह जफर ने किया था जिनको शिवाजी के वंशज मराठों का भी समर्थन हासिल था अतः क्रांति को निर्ममता से कुचल देने के बाद ब्रिटिश सरकार ने 'फूट डालो' की नीति चलाई जिसके अंतर्गत 1905 में पहले बंगाल का 'मुस्लिम' व 'हिन्दू' आधार पर विभाजन किया जिसे जनता की एकता के चलते रद्द करना पड़ा। अतः ढाका के नवाब मुश्ताक हुसैन को भड़का कर 'मुस्लिम लीग' की स्थापना 1906 में मदन मोहन मालवीय की मार्फत 'हिंदूमहासभा' की स्थापना 1920 में तथा हेद्गेवार की मार्फत आर एस एस की स्थापना 1925 में अपने साम्राज्यवादी उद्देश्यों की पूर्ती के लिए करवाई थी और इन संगठनों की मदद से ही देश विभाजन को अंजाम दिया गया था। आज़ादी के तुरंत बाद से ही पाकिस्तान तो अमेरिकी प्रभाव में चला गया था किन्तु भारत 'तटस्थ' नीति पर चल रहा था। 1975 की एमर्जेंसी के कारण 1977 की करारी हार के बाद 1980 में इंदिरा गांधी की वापिसी 'इन्दिरा-देवरस' गुप्त समझौते के अंतर्गत आर एस एस के समर्थन से हुई थी। 1989 में राजीव गांधी ने बाबरी मस्जिद/ राम जन्म भूमि का ताला खुलवा कर पूजा शुरू करवाई थी। 2012 के उत्तर प्रदेश के चुनावों में सपा को भाजपा का समर्थन था तो 2014 के लोकसभा चुनावों में सपा का समर्थन भाजपा को था।इसकी रूपरेखा व्हाईट हाउस में तय की गई थी और उस बैठक में भाग लेने वालों में एक प्रोफेसर लखनऊ के भी रहे थे।  2017 के चुनावों में 'मुलायम-मोदी' गुप्त समझौते के अंतर्गत भाजपा द्वारा सपा का फिर सपा द्वारा 2019 के चुनावों में भाजपा का समर्थन किया जाएगा जबकि माकपा के पूर्व महासचिव प्रकाश करात साहब मुलायम सिंह को तीसरे मोर्चे का पी एम प्रत्याशी बनाना चाहते थे।2019 में 'निष्पक्ष' चुनावों की संभावना क्षीण है और वर्तमान प्रवृति से सांप्रदायिकता का मुक़ाबला नहीं किया जा सकता है।  हमको अपनी नीतियाँ बदलनी चाहिए ड्राईङ्ग रूम में तय करके सड़कों पर प्रदर्शन करने और आर्थिक लड़ाइयों को लड़ने से ही हमें जनता का समर्थन नहीं मिल जाएगा।यदि लोकतान्त्रिक  तरीके से साम्राज्यवाद समर्थक सांप्रदायिक सरकार को हटाना संभव न हुआ तो दिल्ली की सड़कों पर कम्युनिस्टों व सांप्रदायिक शक्तियों में निर्णायक  रक्त-रंजित संघर्ष होगा  जिसके बाद ही तय होगा कि केंद्रीय सत्ता पर सांप्रदायिक शक्तियों का कब्जा बरकरार रहेगा या कि वामपंथियों के नेतृत्व में जन-हितैषी सरकार सत्ता में आएगी। 
जिलामंत्री ख़ालिक़ साहब ने  अपने उद्बोद्धन में बताया कि हम एक-एक मुद्दे को लेकर और एक स्थान का चयन करके अंजाम होने तक संघर्ष की रण-नीति पर चलेंगे। उन्होने 15 अगस्त, 02 अक्तूबर और 26 जनवरी पर पार्टी की ओर से कार्यक्रम आयोजित किए जाने की श्रंखला में डॉ अंबेडकर, कबीर दास, स्वामी विवेकानंद आदि की जयंती को भी जोड़ा। उन्होने कुछ आगामी कार्यक्रमों को दृढ़ता पूर्वक सफल करने की अपील की जिसमें एक पहली सितंबर को 'बख्शी का तालाब' तहसील पर किसान समस्याओं पर प्रदर्शन करना भी है। 
सभापति कामरेड कनहाई राम जी ने सभी को धन्यवाद देने के साथ-साथ यह भी कहा कि हमें विधानसभा और संसद की सभी सीटों पर 'चुनाव' भी लड़ना चाहिए केवल सड़कों पर संघर्ष करने से ही जनता हमारे साथ नहीं जुड़ सकती । जनता को लगना चाहिए कि कम्युनिस्ट सरकार बना कर उसकी समस्याओं को हल कर सकते हैं तभी वह हमारा साथ देगी।  
 
        

Thursday, 19 February 2015

कामरेड गोविंद पंसारे व उनकी पत्नी पर कातिलाना हमला : लोकतन्त्र का काला अध्याय ---लखनऊ में तीखा विरोध






*महाराष्ट्र के कोल्हापुर में प्रातः भ्रमण पर निकले पंसारे दंपति पर कायरतापूर्ण कातिलाना हमला किया जाना भारतीय लोकतन्त्र के लिए एक काला अध्याय है। आज दिनांक 19 फरवरी 2015  को गांधी प्रतिमा, जी पी ओ पार्क, हजरतगंज, लखनऊ में इस हमले के विरोध व हमलावरों की गिरफ्तारी तथा पंसारे दंपति को सरकारी खर्चे पर इलाज की सुविधा दिये जाने की मांग को लेकर भाकपा व माकपा के संयुक्त तत्वावधान में एक विशाल धरना -प्रदर्शन का आयोजन किया गया। सभा की अध्यक्षता महिला फेडरेशन की नेत्री कामरेड आशा मिश्रा व संचालन माकपा के जिलामंत्री कामरेड प्रदीप शर्मा ने किया। 

*प्रारम्भ में भाकपा के जिलामंत्री कामरेड मोहम्मद ख़ालिक़ ने इस प्रकरण पर व्यापक प्रकाश डाला। अन्य वक्ताओं में एडवा नेत्री कामरेड मधु गर्ग, प्रवीण सिंह, परमानंद दिवेदी, राधेश्याम, कान्ति मिश्रा आदि थे। 
धरने  में शामिल होने वाले कामरेड्स में कामरेड कल्पना पांडे'दीपा', प्रो . ए के सेठ, मो . अकरम, शिक्षक नेता  सत्यनारायण, विजय माथुर आदि थे। 

*वस्तुतः लखनऊ में इस विरोध-प्रदर्शन को आयोजित कराने में कामरेड कल्पना पांडे'दीपा' जी का विशेष योगदान उल्लेखनीय है जिन्होने 17 फरवरी को यह sms भेज कर कामरेड्स को उत्प्रेरित किया:
" Hamare Pritishthit Neta Govind Pansare wa unki patni par Kolhaapur me hatyaayi hamle ke virodh me LKO CPI ko AWASHYA KADI Pratikriya deni CHAHIYE,  ------Kalpana Deepa ,17-02-2015 

*ज़िलामन्त्री कामरेड मोहम्मद ख़ालिक़ ने त्वरित कारवाई करते हुये CPM के साथ तालमेल करके आज इस विशाल धरने को सफलतापूर्वक आयोजित किया और उन्होने चेतावनी भी दी कि यदि पंसारे दंपति को शीघ्र न्याय न मिला तो उग्र प्रदर्शन भी आयोजित किए जाएँगे।
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Saturday, 24 January 2015

लखनऊ में ओबामा विरोधी सफल प्रदर्शन --- विजय राजबली माथुर




लखनऊ, 24 जनवरी 2015 : आज  निर्धारित समय से भाकपा कार्यालय -22, क़ैसर बाग  से एक जुलूस के रूप में पार्टी सदस्यों ने चल कर परिवर्तन चौक पर अन्य वामपंथी दलों के साथ संयुक्त होकर  विरोध प्रदर्शन में भाग लिया। मार्ग में गगनभेदी नारे लगाता हुआ प्रदर्शन गंतव्य गांधी प्रतिमा, जी पी ओ पार्क, लखनऊ पहुंचा जहां वह एक सभा में परिवर्तित हो गया। सभा की अध्यक्षता भाकपा, लखनऊ के जिलामंत्री कामरेड मोहम्मद ख़ालिक़ ने की जो बाईं आँख में चोट लगी होने बावजूद सोत्साह प्रदर्शन में शामिल रहे। भाकपा ,उ . प्र. के वरिष्ठ नेता कामरेड रामप्रताप त्रिपाठी की उपस्थिती इसलिए विशेष उल्लेखनीय है कि उन्होने हार्ट समस्या से ग्रस्त होने के बावजूद कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्द्धन करने व अपना आशीर्वाद प्रदान करने हेतु आने का कष्ट किया।  भाकपा के  अन्य सदस्यों में सर्व कामरेड आशा मिश्रा, कल्पना पांडे'दीपा', राकेश, मास्टर सत्य नारायण, मोहम्मद अकरम, पी एन दिवेदी, विजय माथुर आदि भी उपस्थित थे। 

भाकपा की ओर से राकेश जी व आशा मिश्रा जी ने सभा को संबोधित किया एवं ख़ालिक़ साहब ने अध्यक्षीय भाषण दिया। अन्य वामपंथी दलों की भागीदारी व उनके नेताओं के भी भाषण हुये। सभी वक्ताओं ने एक स्वर से अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को गणतन्त्र दिवस पर बुलाये जाने की कटु निंदा एवं नरेंद्र मोदी की घोर भर्तस्ना   की व आगे भी इसका विरोध जारी रखने की घोषणा की। 

प्रदर्शन के दौरान मार्ग में व सभा के बीच में भी कार्यकर्ताओं द्वारा जोशीले नारे लगाए जाते रहे :
बराक ओबामा वापस जाओ,
BARAK OBAMA GO BACK,
नरेंद्र मोदी हाय-हाय ,
नरेंद्र मोदी होश में आओ,
एफ डी आई नहीं चलेगी ,
नरेंद्र मोदी गद्दी छोड़ो, आदि-आदि  

Saturday, 13 December 2014

छह वाम दलों द्वारा एक संयुक्त मार्च --- विजय राजबली माथुर

छह वाम  दलों-भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी,भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्स वादी ),आल इंडिया फारवर्ड ब्लाक,भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माले )लिब्रेशन,सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर आफ इंडिया (कम्युनिस्ट),रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी -द्वारा एक संयुक्त मार्च परिवर्तन चौक से गांधी प्रतिमा,जी पी ओ पार्क,हजरतगंज,लखनऊ तक निकाला गया। कार्यकर्ताओं द्वारा FDI नहीं चलेगी,मोदी सरकार मुर्दाबाद,मंहगाई पर रोक लगाओ,महिलाओं पर हो रहे  अत्याचार पर रोक लगाओ आदि गगन भेदी नारे लगाते हुये चल रहे थे।
भाकपा की ओर से इस संयुक्त मार्च में सर्व कामरेड राम प्रताप त्रिपाठी,फूल चंद यादव,मोहम्मद ख़ालिक़,राकेश (इप्टा),महेंद्र रावत,विजय माथुर, सत्य नारायण  आदि सम्मिलित हुये जो एक जुलूस के रूप में पार्टी साथियों के साथ 22- क़ैसर बाग स्थित पार्टी कार्यालय से परिवर्तन चौक पर अन्य वामपंथी दलों के साथ संयुक्त हो गए थे।
प्रदर्शन में उठाई मांगों का एक ज्ञापन प्रशासन को सौंपा गया जो इस प्रकार हैं-

Tuesday, 31 December 2013

नगर काउंसिल,लखनऊ का गठन- भाकपा के बढ़ते कदम:---विजय राजबली माथुर


 भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, ज़िला काउंसिल,लखनऊ के निर्णयानुसार 30 दिसंबर 2013 को  श्री जगदेव यादव की अध्यक्षता में दाऊद नगर चौराहा फैजुल्ला गंज पर पार्टी कार्यकर्ताओं का एक सम्मेलन एवं जनसभा सम्पन्न हुई। भारी संख्या मे लोग इकट्ठा हुए,सभा को सर्वप्रथम कामरेड परमानंद दिवेदी ने अपने सम्बोधन में कहा कि आज समय आ गया है, जब हम सब को मिल कर एक हो कर- गरीब मजदूर,किसान मेहनतकश लोगों को इन भ्रष्टाचारियों को किनारे करना होगा। नौजवान सभा के अध्यक्ष कामरेड मो. अकरम ने कहा कि बेरोजगार नौजवानों को सरकार ने रोजगार देने का कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया उस दिशा में शीघ्र संघर्ष किया जाएगा।सभा को संबोधित करने वालों मे सच्चिदानंद,अशोक रावत,मो. शरीफ  आदि भी थे सभा का संचालन कामरेड महेंद्र रावत ने किया।
कामरेड विजय माथुर ने क्षेत्र की जनता को भाकपा के गठन का संक्षिप्त इतिहास बताया कि किस प्रकार 1857 की क्रांति के परस्पर फूट के चलते विफल हो जाने के बाद क्रांतिकारी लोग छिट-पुट अङ्ग्रेज़ी सत्ता से संघर्ष करते रहे थे। इन लोगों को संगठित करके स्वामी दयानंद सरस्वती (जो स्वंय 1857 की क्रांति में भाग ले चुके थे और रानी लक्ष्मी बाई के संपर्क मे भी रहे थे) ने 07 अप्रैल 1875 ई (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा-नव-संवत्सर दिवस)पर 'आर्यसमाज' का गठन करके सबसे पहले स्वराज्य का उद्घोष किया था। आर्यसमाज की शाखाएँ ब्रिटिश छावनी वाले नगरों में सबसे पहले खोली गईं थीं।  ब्रिटिश सरकार स्वामी दयानन्द को 'क्रांतिकारी सन्यासी'-REVOLUTIONARY SAINT कहती थी। आर्यसमाज के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए  गवर्नर जनरल लार्ड डफरिन के आशीर्वाद से रिटायर्ड़ ICS एलेन आक्टावियन(A.O.)हयूम ने वोमेश चंद्र (W.C.) बनर्जी की अध्यक्षता में इंडियन नेशनल कांग्रेस की स्थापना करवाई थी जिसका उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्य के सेफ़्टी वाल्व के रूप में काम करना था।दादा भाई नैरोजी आदि नेता खुद को नस-नस में राजभक्त बताते थे। अतः स्वामी दयानन्द के निर्देश पर आर्यसमाजी कांग्रेस में शामिल हो गए और उसे स्वतन्त्रता संघर्ष की ओर मोड़ दिया। डॉ पट्टाभि सीतारमईय्याने 'कांग्रेस का इतिहास' पुस्तक में लिखा है कि गांधी जी के 'सत्याग्रह'आंदोलन में जेल जाने वाले कांग्रेसियों में 85 प्रतिशत आर्यसमाजी थे। इस स्थिति में ब्रिटिश सरकार ने सांप्रदायिक आधार पर बंगाल का विभाजन कर दिया जिसके विरुद्ध सारे देश में जोरदार आंदोलन चला और हालांकि इस विभाजन को रद्द भी करना पड़ा किन्तु ढाका के नवाब मुश्ताक हुसैन को आगे करके 1906 में मुस्लिम लीग,1916 में मदन मोहन मालवीय और लाला लाजपत राय को आगे करके हिन्दू महासभा,1925 में वीर सावरकर और हेद्गेवार को आगे करके RSS की स्थापना ब्रिटिश सरकार ने सांप्रदायिक आधार पर देश की जनता को विभाजित करके अपनी सत्ता मजबूती के लिए करवाई थी।

क्रांतिकारी आर्यसमाजियों ने 1924 में कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना विदेश में की थी । 1925 में कानपुर में मौलाना  हसरत मोहानी की अध्यक्षता में एक सम्मेलन 25 दिसंबर को बुलाया गया था। उस सम्मेलन के स्वागताध्यक्ष थे गणेश शंकर विद्यार्थी। 26 दिसंबर को विधिवत प्रस्ताव पास करके 'भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी' की स्थापना की घोषणा कर दी गई। ब्रिटिश सरकार ने इसे प्रतिबंधित कर दिया था इसलिए इसके कुछ कार्यकर्ता तो गांधी जी के असहयोग आंदोलन में शामिल रहे किन्तु कुछ क्रांतिकारी कार्यकर्ता सरदार भगत सिंह,चंद्र शेखर आज़ाद,रामप्रसाद बिस्मिल,अशफाक़ उल्ला खाँ,बटुकेश्वर दत्त आदि के नेतृत्व में क्रांतिकारी संघर्ष करते रहे। 

1947 में देश को सांप्रदायिक/साम्राज्यवादी आधार पर विभाजित करके पाकिस्तान की संरचना ब्रिटिश सरकार ने अमेरिकी साम्राज्यवाद के इशारे पर की थी। अमेरिका हमेशा पाकिस्तान की समप्रभुत्ता का उल्लंघन करता रहा है और अब हमारी बानिज्य राजनयिक देवयानी खोबरागड़े को गिरफ्तार व अपमानित करके भारत की  सम्प्रभुत्ता को भी चुनौती दे रहा है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अमेरिकापरस्ती बेनकाब होने के बाद पहले मोदी को आगे किया गया था किन्तु उन पर सांप्रदायिक नर-संहार का ठप्पा लगा होने के कारण 'आप' व केजरीवाल को अमेरिकी साम्राज्यवाद की रक्षा के लिए आगे लाया गया है। अतः कम्युनिस्ट कार्यकर्ताओं एवं क्षेत्र की जनता को आगामी लोकसभा चुनावों में इस खतरे को ध्यान में रख कर ही मतदान  में भाग लेना चाहिए। 

मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुये जिलामंत्री कामरेड मोहम्मद ख़ालिक़ ने क्षेत्रीय जनता को झकझोरते हुये कहा कि देवी दुर्गा का झण्डा भी लाल है, हनुमान का झण्डा भी लाल है और हमारी कम्युनिस्ट पार्टी का झण्डा भी लाल है। जिस प्रकार दुर्गा व हनुमान ने दुष्टों का नाश किया था उसी प्रकार कम्युनिस्ट पार्टी भी किसानों/मजदूरों का शोषण करने वाले दुष्टों का नाश करने के लिए संघर्ष करती है। अतः लोगों को अपनी कम्युनिस्ट पार्टी को मजबूत करने के लिए इसमें शामिल होना चाहिए। कामरेड ख़ालिक़ ने यह भी कहा कि जनता को ईमानदार भी बनना पड़ेगा और अपने वोट को जाति,धर्म,संप्रदाय के आधार पर बिकने नहीं देना होगा तभी कम्युनिस्ट पार्टी चुनावों में सफल हो सकेगी और विधायिका से जनता के हक़ के कानून पास करा सकेगी। कामरेड ख़ालिक़ ने लोगों से अपील की कि वे महिलाओं को भी आगे लाएँ क्योंकि महिलाओं की भागीदारी के बिना कोई भी संघर्ष सफल नहीं हो सकता है। उन्होने रानी लक्ष्मीबाई,दुर्गा भाभी का ज़िक्र करते हुये महिलाओं के बलिदान की सराहना की। 

कामरेड ख़ालिक़ ने भी जनता को आगाह करते हुये समझाया कि कांग्रेस सरकार तो अमेरिका के इशारे पर जनता की लूट कर ही रही है उसके विकल्प के रूप में पहले अमेरिका ने मोदी को बढ़ाया था लेकिन मोदी को सफल होते न देख कर अमेरिकी साम्राज्यवाद और कारपोरेट घरानों ने केजरी वाल को आगे बढ़ा दिया है। उन्होने बताया कि तीन साल पहले उनकी अध्यक्षता में सम्पन्न हुई एक घोष्ठी में बोलने केजरीवाल भी आए थे तब उनको कोई जानता भी न था और आज वह दिल्ली के मुख्यमंत्री बन गए हैं। कैसे?उन्होने कहा कि हमारी कम्युनिस्ट पार्टी को एक रुपया भी चन्दा न देने वाले कारपोरेट घरानों ने केजरीवाल को एक ही दिन में बीस करोड़ रुपया जुटा दिया  और उनको और अधिक चन्दा लेने से मना करना पड़ा। कामरेड ख़ालिक़ ने जनता को समझाया कि जिनका रुपया लेकर केजरीवाल नेता बने हैं उनको ही लाभ पहुंचाएंगे,आम जनता को नहीं। जनता को अपनी कम्युनिस्ट पार्टी का साथ देना चाहिए और किसी के भी बहकावे में भटकना नहीं चाहिए।

कामरेड ख़ालिक़ ने बताया कि कोर्ट के आदेशों के विपरीत बिजली विभाग किसानों व गरीब बस्तियों में रहने वाले मजदूरों का शोषण-उत्पीड़न कर रहा है जिसके विरुद्ध संघर्ष के लिए उन्होने महिलाओं से भी आगे आने का निवेदन व आह्वान किया।उन्होने घोषणा की कि कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य कौंसिल के निर्णय के अनुसार आज से 10 जनवरी 2014 तक बिजली की दरों में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी और तत्काल लागू करने के खिलाफ जन जागरण अभियान किया जाएगा और दिनांक 11 जनवरी 2014 को गांधी प्रतिमा हजरतगंज में धरना दिया जाएगा जिसमें क्षेत्रीय नागरिक भी बढ़-चढ़ कर भाग लेंगे।

 सभा के अंत में नगर कौंसिल का चुनाव किया गया जिसमें कामरेड  राजपाल यादव को नगर मंत्री, भाकपा लखनऊ तथा  कामरेड बलवंत लोधी व  कामरेड राम चंदर को सह सचिव चुना गया। अन्य 15 लोगों की नगर कौंसिल चुनी गयी। नगर कौंसिल भाकपा के पैनल में पर्यवेक्षक ऐनूद्दीन व संयोजक अशोक रावत का  मार्ग दर्शन रहा।