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Tuesday, 18 October 2016

किसने रोक रखा है सर्वहारा क्रांति को ------ हिम्मत सिंह

ब्राह्मणवाद मुख्य रूप से गैरबराबरी और शोषण का तंत्र है :: 



Himmat Singh
16-10-2016 

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं को सामना :
एक सवाल जिसे बार-बार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं को सामना करना पड़ता है, उसे साथी मनोज सिंह ने बड़ी सटीकता से उठाया है, लेकिन यह वही बचकाना सवाल है जो पहले भी कम्युनिस्ट पार्टियाँ करती रही हैं और खुद ही जवाब भी देती रही हैं वह है जाति और धर्म का सवाल. लगभग सौ साल होने को आ गए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टियों के काम करते इस देश में, आज भी वही सनातन रूप से सवाल उठते हैं और खुद ही जवाब देते रहते हैं. इसी सन्दर्भ में कामरेड मनोज जी का कथन बिना किसी रुकावट के यहाँ दे रहा हूँ और उसपर मेरी टिपण्णी भी.
कॉमरेड मनोज सिंह कहिन:: 
पहले धर्म-जाति का सवाल या सर्वहारा क्रान्ति कि?
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बदलाव निश्चित है, बस सर्वहारा वर्ग को इस बदलाव की दशा और दिशा तय करना है, साथ ही इसकी गति को तेज़ करने की ज़रुरत है। यह सत्य है कि सर्वहारा क्रान्ति के राह में ऐसे कई सवाल है जिसपर ध्यान देने की ज़रुरत है। इसका मतलब ये नहीं की वर्गीय चेतना की राह को धीमां कर पहले धर्म या जाति के सवाल को हल किया जाए। मेरी नज़र में सही रास्ता सिर्फ ये है कि सर्वहारा के आर्थिक बराबरी और स्वतन्त्रता के बाद ही ब्राह्मणवाद, सामन्तवाद, साम्प्रदायिकता और पूंजीवाद से छुटकारा संभव होगा। हां धर्म और जाति के सवाल को ज़रूर इस बड़ी लड़ाई में शामिल कर उसके खिलाफ भी युद्ध छेड़ना ही होगा, पर बड़ा सवाल तो सर्वहारा के सत्ता स्थापना के बाद ही हल होगा। तभी समतामूलक, जातिविहीन और आर्थिक समाज की स्थापना संभव है।
मेरी यानी कि (Himmat Singh) की टिप्पणी :
मनोज भाई, वही रटी-रटाई बात दुहरा रहे हैं, आखिर किसने रोक रखा है सर्वहारा क्रांति को. बहुत ही बचकाना सवाल है. जब हम कहते हैं कि भारतीय समाज का सारा का सारा तंत्र विकसित ही हुआ है इसी तरह से, जिसे हम जातीय व्यवस्था या यूं कहें ब्राह्मणवादी तंत्र कहते हैं. और यह ब्राह्मणवाद मुख्य रूप से गैरबराबरी और शोषण का तंत्र है. उसमे कोढ़ में खाज यह कि यहाँ जो पूँजीवाद विकसित हुआ है, वह भी वर्णाश्रमी ब्राह्मणवाद के तहत ही विकसित हुआ है इसे प्रचलित भाषा में हिन्दू पूँजीवाद कह सकते हैं. इस व्यवस्था को नए सिरे से खाद-पानी और मजबूती प्रदान किया अंग्रेजों ने, उन्हेंने यहाँ आकर देखा कि ब्राह्मणवादियों ने शोषण को शास्वत संरचना प्रदान कर रखी है. बन्दोस्बस्ती कानून (Settlement Act) के जरिये अकारण ही नहीं इन सवर्ण ब्राह्मणवादियों के हाथों में संसाधनों का हस्तांतरण तथा शूद्रों आदिवासियों और मुसलमानों को तत्कालीन ब्रिटिश पूँजीवाद के सस्ता मैन्युअल लेबर में तब्दील कर दिया गया. इंडियन फारेस्ट एक्ट १८६५ के जरिये आदिवासियों को जंगल से बेदखल करना. मैकाले एजुकेशन सिस्टम के जरिये मुसलमानों को शिक्षा से लगभग बाहर धकेलना, संस्कृति के नाम पर शंकराचार्य के नए ब्राह्मणवाद को स्थापित करना. पूरी समग्रता में देखे बगैर चीजों को अलग-थलग रूप में देखने पर व्यापक बदलाव या उत्पीडित जन के मुक्ति के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता है.
https://www.facebook.com/hmtsinghdelhi/posts/10208998756598467




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( मैंने समय समय पर कई कई बार यह स्पष्ट करने का प्रयास किया है कि, 'नास्तिकवाद ' : 'एथीज़्म ' की थोथी  ज़िद्द के चलते 'धर्म ' को 'मजहबों ' के समकक्ष रख कर शहीद भगत सिंह व महर्षि कार्ल मार्क्स की आड़ में ठुकरा दिया जाता है जो वस्तुतः एक गंभीर 'ब्राह्मण वादी चाल ' है। 
यदि हम धर्म का मर्म समझ कर जनता को समझाएँ तो जनता फासिस्ट शक्तियों के अधर्म को धर्म मानने की गलती न करे और तब हम जनता को समझा सकते हैं कि, जन्मगत जाति व्यवस्था प्राकृतिक नियमों के प्रतिकूल और शोषण पर आधारित है। वेदों में कर्मगत आधार पर वर्णाश्रम व्यवस्था थी जो कर्म के आधार पर थी न कि, जन्म के आधार पर। लेकिन ब्राह्मण वाद की चाल को न समझते हुये ख़्वामख़्वाह की ज़िद्द के चलते धर्म को ठुकराने का ठोस लाभ सांप्रदायिक/फासिस्ट शक्तियों को मिल रहा है )
------ विजय राजबली माथुर 
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फेसबुक कमेंट्स : 
18-10-2016 

Sunday, 6 September 2015

जब फासिस्ट तानाशाही का खतरा सिर पर हो तब आपस मे लठठम लठठास ? --- विजय राजबली माथुर


State Council UP CPI को बाजारवादियों से आज़ाद करो। आज़ाद करो।--- Fakhrey Alam


वामपंथ और साम्यवाद के लिए इतनी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उत्तर प्रदेश के बाजारवादी/ब्राह्मणवादी तत्व अपने ही  एक कर्मठ राष्ट्रीय सचिव कामरेड अतुल अनजान साहब पर जब तब तीखे प्रहार करते रहते हैं। फेसबुक पर एक बड़े पदाधिकारी को मुखौटा बना कर इन तत्वों ने अनर्गल बातें लिखवाई हैं। पहले भी कई-कई बार ये प्रदेश में पार्टी को विभाजित करा चुके हैं ,कर्मठ कार्यकर्ताओं को पार्टी से अलग होने पर मजबूर करते हैं ऐसे ही लोगों से उत्तर प्रदेश राज्य काउंसिल को मुक्त करने की फखरे आलम साहब की अपील पार्टी को मजबूत बनाने के लिए है।  बाजारवादी/ब्राह्मणवादी तत्व यदि इस बार फिर सफल होते हैं तो यह सिर्फ CPI के लिए ही नहीं सम्पूर्ण वामपंथ के विनाश का आगाज होगा। जनता मे आम चर्चा है कि ब्राह्मण वामपंथी फासिस्ट सरकार का समर्थन कर रहे हैं। फासिस्ट सरकार के अश्लील विज्ञापन का विरोध करने पर जिस प्रकार कॉमरेड अतुल अनजान साहब पर  बाजारवादी/ब्राह्मणवादी तत्वों ने  वाक -प्रहार करवाया है उससे तो उस जन-चर्चा को ही बल मिलता है। जब फासिस्ट तानाशाही का खतरा सिर पर हो तब उसका मुक़ाबला करने के बजाए अपने ही कर्मठ नेता पर लांछन लगाना निंदनीय कृत्य है। 
http://communistvijai.blogspot.in/2015/09/blog-post.html
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उपरोक्त संदर्भित पिछली पोस्ट के बाद फेसबुक पर और ज़्यादा ही ऊताचाल देखने को मिल रहा है जैसा कि इस फोटो से स्पष्ट है।
"Comrade Anjan was defended by AIDWA General Secretary Jagmati Sangwan, who said that he was objecting to the advertisement not to Leone as an individual, “Not only he, we too are offended when the ad is aired on TV, his remarks shouldn’t be taken personally, we demand that the company withdraw the ad because it instigates sexual violence.”   http://www.thenewsminute.com/article/atul-anjans-comment-sunny-leone-shows-left-not-free-gender-bias-insiders-critique-34018"

कुछ इस तरह का वातावरण बनाया जा रहा है कि कामरेड अतुल अनजान साहब ने कोई भयंकर अपराध किया है जिसकी सजा उनको मिलनी ही चाहिए। यह कोई पहली बार ऐसा नहीं हो रहा है। दो वर्ष पूर्व भी अनजान साहब व बर्द्धन जी के विरुद्ध एक सुनियोजित अभियान चलवाया गया था अतुल जी के दूसरी पार्टी मेंजाने की गलत अफवाह भी उड़ाई गई थी । उसका खंडन उन्होने किया था :


यह एक अलग बात है जिसको मुखौटा बना कर कुत्सित- घृणित अभियान चलवाया गया था उसको पार्टी से केंद्रीय आदेश पर निकाला गया किन्तु वैधानिक प्रक्रिया से नहीं।  इस बार फिर अश्लील विज्ञापन के विरोध में उनके बयान को वीडियो में हेर-फेर करके पेश किया गया है हालांकि उसका भी स्पष्टीकरण उन्होने दे दिया है। उसके बाद भी माले नेत्री ने उन पर गंभीर प्रहार किया है जिस पर फेसबुक में उनको समर्थन भी मिल रहा है। 

उत्तर प्रदेश में बाजारवादी/ब्राह्मण वादी लोग भाकपा पर हावी हैं जो बार-बार अनजान साहब को निशाना बनवाते हैं।टी वी चेनल्स में एक के पुत्र के माध्यम से इंनका प्रभाव है  जिसका इस्तेमाल अनजान साहब के विरुद्ध दुष्प्रचार में किया जाता है। इनके नायक का कहना है कि अनजान साहब को केंद्र में उन्होने भेजा है और प्रदेश सचिव की पीठ पर भी उनका हाथ है। पिछली अफवाह के बाद उन नायक साहब ने अनजान साहब से लगभग आधा घंटे फोन वार्ता द्वारा आश्वासन दिया था कि इस बार वह प्रदेश सचिव बदल देंगे। किन्तु आश्वासन पूरा किया नहीं और जिनको विकल्प के रूप में पेश करने की बात कही थी उनको इस बार के दुष्प्रचार का मुखौटा बना दिया गया। इतने से भी बात नहीं बनी तो माले के संपर्को को आगे किया गया है। 

माले वाली लेखिका या फेसबुक पर कमेन्ट करने वाले अनजान साहब के विरुद्ध चलने वाले दुष्प्रचार की बात से पूरी तरह अनभिज्ञ हैं। उन बाजारवादी/ब्राह्मण वादी लोगों की निगाह '22-क़ैसर बाग' की बिल्डिंग पर लगी हुई है और वे इसके वारे-न्यारे करके मालामाल होना चाहते हैं। उनको लगता है कि 'अनजान' साहब उनके इस काले कारनामे में सबसे बड़ी बाधा हैं। अतः अनजान साहब को पार्टी से अलग कराने हेतु जब-तब अभियान चलवाते रहते हैं। ये तत्व पिछले 21 वर्षों में दो बार प्रदेश में पार्टी को विभाजित करा चुके हैं। इनके नायक की हिदायत है कि SC/OBC वर्ग के कार्यकर्ताओं से काम तो लो लेकिन उनको दायित्व न दो अर्थात पदाधिकारी न बनाओ। इसी वर्ष इन दो वर्गों से संबन्धित विधानसभा चुनावों में प्रत्याशी रहे दो लोगों को अपने समर्थकों सहित पार्टी छोडने पर मजबूर होना पड़ा है। इन तथ्यों को जाने बगैर अनजान साहब पर प्रहार करने वाले लोग वस्तुतः बाजारवादी/ब्राह्मण वादी लोगों के मंसूबे पूरे कर रहे हैं बल्कि प्रकारान्तर से सत्तरूढ़ फासिस्ट सरकार को मजबूत बनाने में मदद कर रहे हैं। इसी लिए साम्यवाद को समर्पित कार्यकर्ता का कहना है ---
State Council UP CPI को बाजारवादियों से आज़ाद करो। आज़ाद करो।--- Fakhrey Alam
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