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Wednesday, 29 April 2026

ये वीरांगनाएं ------ गुरुदास

 




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🔴 कौन हैं सृष्टि गुप्ता, आकृति चौधरी और मनीषा चौहान —  

जिन्हें नोएडा पुलिस ने गिरफ़्तार किया?

आज जब इन तीनों महिलाओं को मुजरिम की तरह पेश किया जा रहा है, तब एक पल ठहरकर यह जानना और भी ज़रूरी हो जाता है कि—आख़िर ये हैं कौन?  

इनकी विचारधारा क्या है?  

इनके सामाजिक सरोकार क्या हैं?  

ये किन मुद्दों पर खड़ी होती रही हैं और किस तरह के कामों में सक्रिय रही हैं?

आइए, देखते हैं इनके जीवन और काम की एक झलक—ताकि तस्वीर का वह पहलू भी सामने आ सके, जो शोर और आरोपों के बीच अक्सर दबा दिया जाता है।

➤ सृष्टि गुप्ता :

यह लखनऊ की रहने वाली एक संवेदनशील और सक्रिय छात्र-कार्यकर्ता हैं। वे एक कलाकार हैं और शांतिनिकेतन की पूर्व छात्रा रही हैं। दिल्ली के मॉडल टाउन में रहकर वे समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के बीच काम करती रही हैं। मजदूर बस्तियों में नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और शिक्षा, सम्मान व बराबरी के सवालों को जनता के बीच ले जाना उनके काम का हिस्सा रहा है।  

वे दिशा छात्र संगठन से भी जुड़ी रही हैं, जो छात्र हितों के मुद्दों को सर्वोपरि मानता है और क्रांतिकारी विचारधाराओं से प्रेरित सामाजिक-शैक्षिक सरोकारों के लिए काम करता है।

➤ आकृति चौधरी :

यह एक थिएटर कलाकार हैं और DNU की पूर्व छात्रा रही हैं। दिल्ली में रहकर वे सामाजिक कार्यों में सक्रिय रही हैं—झुग्गी बस्तियों के बच्चों को पढ़ाना, महिला मुद्दों पर काम करना और छात्र आंदोलनों में भाग लेना उनके काम का हिस्सा रहा है। उनके काम का केंद्र शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय रहा है।  

वे भी दिशा छात्र संगठन से जुड़ी रही हैं, और छात्र हितों तथा सामाजिक न्याय के सवालों पर सक्रिय भागीदारी निभाती रही हैं।

➤ मनीषा चौहान :

यह एक फैक्ट्री वर्कर होने के साथ-साथ सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। वे उन युवा स्त्रियों में से हैं जिन्होंने अपने व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर समाज के व्यापक हित को प्राथमिकता दी। वे मजदूरों और महिलाओं के मुद्दों पर सक्रिय रही हैं और ज़मीनी स्तर पर लोगों को संगठित करने का काम करती रही हैं।

इन्होंने दिल्ली में चले बादाम मजदूरों के आंदोलन, आंगनवाड़ी वर्कर्स के संघर्ष और सैकड़ों महिला आंदोलनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। राजधानी दिल्ली में महिला आंदोलनों में इनकी मजबूत भागीदारी रही है और ये मजदूर आंदोलनों से भी गहराई से जुड़ी रही हैं।

तीनों की सोच और जीवनदृष्टि सावित्रीबाई फुले, फातिमा शेख और दुर्गा भाभी जैसी ऐतिहासिक हस्तियों के संघर्षों से प्रेरित है। वे खुद को इसी संघर्षशील विरासत का हिस्सा मानती हैं।

लेकिन दूसरी तरफ़__

11 अप्रैल को नोएडा में चल रहे शांतिपूर्ण मजदूर आंदोलन के दौरान इन तीनों को सादी वर्दी में पुलिसकर्मियों द्वारा बोटेनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन से उठाया गया। आरोप है कि यह कार्रवाई बिना स्पष्ट वारंट और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए की गई।

कानून—विशेषकर BNSS और सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश—गिरफ्तारी को लेकर कुछ स्पष्ट सुरक्षा देते हैं:

• सूर्यास्त के बाद महिला की गिरफ्तारी सामान्यतः नहीं की जा सकती।

• विशेष स्थिति में मजिस्ट्रेट की अनुमति और महिला पुलिसकर्मी की मौजूदगी अनिवार्य होती है।

• अरेस्ट मेमो देना और परिवार/वकील को सूचना देना जरूरी होता है।

• 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना अनिवार्य होता है।

इन नियमों का मकसद नागरिकों—खासतौर पर महिलाओं—की सुरक्षा करना है। लेकिन इस मामले में इनके उल्लंघन के आरोप इस पूरी कार्रवाई को गंभीर सवालों के घेरे में खड़ा करते हैं।

और सबसे चिंताजनक बात…

लोकतंत्र का चौथा स्तंभ होने का दावा करने वाला मीडिया भी इस पूरे मामले में निष्पक्ष नहीं दिखता। कई न्यूज़ चैनल इन तीनों को अदालत के फ़ैसले से पहले ही “अपराधी” की तरह पेश कर रहे हैं।  

बिना ठोस प्रमाण और न्यायिक प्रक्रिया पूरी हुए इस तरह का मीडिया ट्रायल न सिर्फ़ न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है, बल्कि पत्रकारिता की जिम्मेदारी और विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

सवाल सिर्फ तीन नामों का नहीं है…

क्या मजदूरों के हक़ की बात करना अपराध है?  

क्या सामाजिक न्याय के लिए खड़ा होना साज़िश है?  

क्या शांतिपूर्ण आंदोलनों का समर्थन करना कानून के खिलाफ है?

हम यह स्पष्ट चाहते हैं कि तीनों को निष्पक्ष और पारदर्शी कानूनी प्रक्रिया मिले।  

गिरफ्तारी से जुड़े सभी तथ्यों की स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए, जिससे लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

केवल खबरें सुनना या देखना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि उनपर विचार करना,  सत्य और झूठ की परख करना भी जरूरी है। 

#ManishaChauhan #SrishtiGupta #AkritiChaoudhary #noidaworkerprotest

Saturday, 30 August 2014

हंसिया-बाली के चुनाव निशान के सामने वाला बटन दबायें!---डॉ गिरीश

उत्तर प्रदेश विधान सभा के उपचुनावों में प्रदेश के मतदाताओं से भाकपा की अपील
आपसी मेल-मिलाप बढ़ाने! महंगाई, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी पर लगाम लगाने! महिलाओं, कमजोर वर्गों पर अत्याचार रोके जाने तथा अपने विधान सभा क्षेत्र एवं जनपद के समग्र विकास के लिये!
हंसिया-बाली के चुनाव निशान के सामने वाला बटन दबायें! भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रत्याशियों को सफल बनायें!
उत्तर प्रदेश के मतदाता भाइयो और बहिनो!
अभी हाल ही में हुये लोकसभा के चुनावों में आप सभी ने बड़ी ही उम्मीद और आशा के साथ एक पार्टी को भारी बहुमत देकर केन्द्र की गद्दी पर पहुंचाया था. लेकिन इस सरकार को काम करते हुये अभी सौ दिन भी नहीं हुये हैं और इस सरकार से सभी को गहरी निराशा हाथ लगी है.
हमारी सीमाओं के पार से तड़-तड़ गोलियां चल रही हैं और सीमाओं के रक्षक हमारे जवान लगातार शहीद होरहे हैं. सत्ता में आने के बाद इस सरकार ने पिछली केन्द्र सरकार की नीतियों को और भी जोर-शोर से लागू किया है और डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस, रेल किराया और मालभाड़े की दरों में भारी बढ़ोत्तरी की है. इससे हर चीज की कीमतें आसमान छूरही हैं और महंगाई की मार से जनता त्राहि-त्राहि कर रही है. भ्रष्टाचार के खिलाफ बड-चड़ कर बातें करने वालों की यह सरकार अपने थोड़े समय के कार्य काल में ही तमाम आरोपों में घिरती जारही है. केन्द्र सरकार के पहले बजट ने ही विकास के इसके दाबों की कलई खोल कर रख दी. बेरोजगार नौजवानों, छात्रों, महिलाओं, किसानों, मजदूरों, दस्तकारों, दलितों, अल्पसंख्यकों और पिछड़ों सभी को इसने निराश किया है. जनता ने भाजपा को इस आशा से वोट दिये थे कि उनके अच्छे दिन आयेंगे, लेकिन आगये बेहद बुरे दिन. यह पार्टी और इसकी सरकार पूरी तरह पूंजीपतियों और कार्पोरेट घरानों के हित में काम कर रही है और आम जनता को तवाह कर रही है. इससे केन्द्र सरकार के प्रति जनता में गुस्सा पैदा होरहा है. जिसका प्रमाण है हाल ही में उत्तराखण्ड, बिहार, कर्नाटक, पंजाब, मध्य प्रदेश के उपचुनाव जहां भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिली. अब तो भाजपा की अंतर्कलह भी खुलकर सामने आगयी है. इस सबसे जनता का ध्यान बंटाने और उसे आपस में लड़ाने को भाजपा द्वारा तरह तरह के हथकंडे अपनाये जारहे हैं. सांप्रदायिकता को खास औजार बनाया जारहा है.
उत्तर प्रदेश की सरकार ने भी आम जनता को हर मोर्चे पर निराश किया है. हर तरह के अपराध बड रहे हैं. महिलाओं और यहां तक कि अबोध बालिकाओं के साथ दुराचार और उसके बाद उनकी हत्या आम बात होगयी है. हत्या, लूट, राहजनी आदि हर तरह के अपराध बड रहे हैं. सांप्रदायिक दंगों को काबू करने में सरकार की हीला हवाली साफ दिखाई देरही है. एक तिहाई उत्तर प्रदेश को बाढ़ ने तो शेष को भयंकर सूखे ने तवाह कर दिया है. सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है. पीड़ित किसानों ने आत्म हत्याएं करना शुरू कर दीं हैं. अभूतपूर्व बिजली संकट से हर कोई परेशान है. किसानों का चीनी मिलों पर करोड़ों रुपया बकाया है जिसे अदा नहीं कराया जारहा. डीजल आदि खेती के लिये जरूरी चीजों पर राज्य सरकार ने टैक्स बढ़ा दिया है. राशन प्रणाली में लूट मची है. बेरोजगारी से निपटने को कारगर कदम नहीं उठाये जारहे, शिक्षा को व्यापार बना डाला है. शिक्षा बेहद महंगी है अतएव आम बच्चे शिक्षा नहीं लेपारहे. बेकारी भत्ता और लैपटाप आदि भी देना बंद कर दिया गया है. इलाज भी आज बहुत ही महंगा होगया है. सडकों का बुरा हाल है. भ्रष्टाचार ने सभी को तवाह किया हुआ है और गुंडे अपराधी माफिया दलाल सभी खुशहाल हैं.
केंद्र और राज्य सरकार को अपने इन कदमों को पीछे खींचने को मजबूर करना होगा. इसके लिये संसद और विधान सभा के भीतर और बाहर संघर्ष करना होगा. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने आजादी की लड़ाई से लेकर आज तक किसानों, कामगारों और आम जनता के हित में लगातार आवाज उठाई. है. हमें गर्व है कि हम पर आजतक भ्रष्टाचार का कोई भी आरोप नहीं लगा. सांप्रदायिकता और जातिवाद जैसी बुराइयों से हम कोसों दूर हैं. महंगाई भ्रष्टाचार बेकारी और अशिक्षा को दूर करने को हम जुझारू आन्दोलन करते रहे हैं. जातिगत लैंगिक समानता और आपसी भाईचारे के लिये हम हमेशा प्रतिबद्ध रहे हैं. हमारी समझ है कि देश और समाज की आज की समस्यायों का निदान मौजूदा पूंजीवादी व्यवस्था में संभव नहीं है. आजादी को आये ६७ वर्ष बीत गये और हमारी समस्यायें जस की तस बनी हुयी हैं. इन समस्यायों का समाधान केवल समाजवादी व्यवस्था में ही संभव है और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी समाजवादी समाज का निर्माण करने को प्रतिबध्द है.
लेकिन ये चुनाव मध्यावधि चुनाव है. केन्द्र अथवा राज्य सरकार बनाने के लिये नहीं. अतएव इन चुनावों में आप भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रत्याशियों को अवश्य ही मौका दे सकते हैं. यदि आपके क्षेत्र से भाकपा प्रत्याशी विजयी होगा तो आपकी समस्याओं के समाधान तथा क्षेत्र के विकास के लिये निश्चय ही वह औरों से अधिक जोरदारी से आवाज बुलंद करेगा. वह हर वक्त आपकी सेवा और सहयोग के लिये आपके बीच रहेगा.
अपनी सीमित ताकत और सीमित साधनों के चलते प्रदेश में भाकपा ने केवल चार स्थानों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं. वे हैं – नोएडा से प्रोफेसर सदासिव चामर्थी, सिराथू से शिवसिंह यादव, हमीरपुर से श्यामबाबू तिवारी तथा लखनऊ पूर्व से राजपाल यादव.
अतएव आप सभी से विनम्र अनुरोध है कि आप १३ सितंबर को होने जा रहे विधानसभा के उपचुनावों में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रत्याशियों के चुनाव चिन्ह हंसिया और बाल के सामने वाला बटन दबा कर भारी बहुमत से सफल बनायें तथा भाकपा प्रत्याशियों एवं भाकपा उत्तर प्रदेश इकाई की तन मन धन से मदद करें.
निवेदक
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश राज्य काउन्सिल
२२, कैसरबाग, लखनऊ


साभार : 
https://www.facebook.com/dr.girishcpi/posts/272519279624114