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Friday, 2 January 2015

अदूरदर्शिता व राजनीतिक अपरिपक्वता का परिचायक --- विजय राजबली माथुर


कामरेड अरविंद राज स्वरूप जी की  फेसबुक वाल पर उपरोक्त संदर्भित टैग देखा जिस पर किसी भी कामरेड की कोई प्रातक्रिया न देख कर मैंने अपना मूल्यांकन लिख दिया था।

  • Vijai RajBali Mathur भाकपा के इन पूर्व प्रत्याशियों का यह निर्णय उनकी अदूरदर्शिता व राजनीतिक अपरिपक्वता का परिचायक प्रतीत होता है और यह भी आभास दिलाता है कि वे पार्टी में किसी प्रलोभनवश ही आए थे तथा उनका जन-सरोकारों से कोई वास्ता नहीं था। 
     उसके बाद कामरेड हक ने भी अपना रिमार्क लिखा है।

    • Nasirul Haque Yeh log kab se party men the aur istafa ka karan bhi likhana chahie

ज़िला सम्मेलन से पूर्व वरिष्ठ नेता गण  को इन दोनों की संदेहास्पद गतिविधिधियों की सूचना दी गई  थी। उन  दोनों को यह भी सूचित किया गया   था कि प्रो ए के सेठ साहब अगस्त में मेरे पास गिरीश जी के आदेश से आए थे और लगभग तीन घंटे अतुल अंजान साहब व एक -आधा घंटे गिरीश जी के विरुद्ध प्रवचन देते रहे थे जिस कारण मैंने अपने घर पर उनका प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया था। ज्ञात हुआ है कि उसके बाद सेठ साहब राजपाल व महेंद्र के घर कई बार गए और काफी चर्चाएं करते रहे। ये लोग मुझे सूचित कर गए थे कि मुझको ज़िला सम्मेलन में भाग लेने से वंचित किया जा रहा है और नई काउंसिल में नहीं रखा जाएगा।  उस बात को भी उन दोनों  को मेसेज के जरिये बता दिया गया  था। परंतु किसी का नाम काट कर मुझे सम्मेलन में शामिल कर लिया गया उनकी दूसरी बात सही रही। क्योंकि मुझे किसी पद पर रहने या उसके जरिये अरनिंग नहीं करनी है इसलिए मुझे कोई फर्क भी नहीं है। 13 दिसंबर के प्रदर्शन और 26 दिसंबर के स्थापना दिवस कार्यक्रम  में ख़ालिक़ साहब ने बुलाया और मैं दोनों में उपस्थित भी रहा। नव-वर्ष पर ख़ालिक़ साहब समेत कुल चार कामरेड्स  से बात भी हुई। पलायनकर्ताओं   ने  बताया था कि ख़ालिक़ साहब ने इन लोगों को आशीर्वाद भी दिया है जबकि ख़ालिक़ साहब ने बताया कि अगर पार्टी के खिलाफ बयान देंगे तो इनको निष्कासित किए जाने की घोषणा कर देंगे जो कि वाकई ठीक है।
2012  के विधानसभा चुनाव में ख़ालिक़ साहब ही महेंद्र को पार्टी में लाये और मलीहाबाद से चुनाव लड़वाया तभी  उनके चुनाव एजेंट अकरम ने कह दिया था कि अगली बार इनको टिकट नहीं दिया जाएगा। राजपाल को महेंद्र लाये थे जिनको ख़ालिक़ साहब ने 2014 के उपचुनाव में लखनऊ पूर्व से टिकट दिलवाया और परिणाम के दिन ही एनुद्दीन ने घोषणा कर दी कि अगली बार इनको टिकट नहीं दिया जाएगा। अकरम और एनुद्दीन दोनों ही ख़ालिक़ साहब के दायें-बाएँ हैं और ख़ालिक़ साहब खुद अशोक मिश्रा जी के शिष्य हैं। अशोक मिश्रा जी ने गिरीश जी से कहा था कि इन लोगों से सिर्फ काम लेना चाहिए और कमांड नहीं देनी चाहिए ,खुद गिरीश जी यादवों से नफरत करते हैं। ऐसी परिस्थितियों में प्रतीत होता है कि प्रो सेठ के माध्यम से अशोक मिश्रा जी ने इन दोनों को पार्टी छोडने का पाठ पढ़वाया होगा जिस पर इन लोगों ने बगैर कुछ भी सोचे-समझे अमल कर दिया है।इस संदर्भ में अशोक मिश्रा जी के ज़िला सम्मेलन के उदघाटन पर दिये गए भाषण से भी समझा जा सकता है:

पूर्व घोषणा के अनुसार विगत 23 नवंबर 2014 को भाकपा, लखनऊ का 22 वां ज़िला सम्मेलन आयोजित हुआ। प्रारम्भ में प्रदेश की ओर से पर्यवेक्षक महोदय ने इसका उदघाटन उद्बोद्धन दिया। अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय, प्रांतीय परिस्थितियों का सवा घंटे उल्लेख कर जब वह ज़िले की परिस्थितियों पर आए तो उनके असंतोष व आक्रोश का प्रस्फुटन हुआ।खुद बारह वर्ष लखनऊ के ज़िला सचिव व आठ वर्ष प्रदेश के सचिव रह चुके पर्यवेक्षक महोदय  जिलामंत्री जी से काफी खिन्न थे और उनकी सांगठानिक कार्य प्राणाली की तीखी भर्त्सना कर डाली। उनके द्वारा इंगित किया गया कि यह ज़िला सम्मेलन बगैर शाखाओं व मध्यवर्ती कमेटियों के सम्मेलन करवाए हो रहा है। उनके द्वारा यह भी उद्घाटित किया गया कि वह लखनऊ के ही हैं और यहीं रहने के कारण यहाँ की हर गतिविधि से बखूबी वाकिफ भी हैं। इस क्रम में उनके द्वारा साफ शब्दों में कहा गया कि वह मलीहाबाद और लखनऊ पूर्व से रहे प्रत्याशियों से काफी असंतुष्ट हैं क्योंकि उन दोनों ने संगठन के विस्तार पर कोई ध्यान ही नहीं दिया है। अपने गुस्से को और आगे बढ़ाते हुये कठोर शब्दों में इन दोनों को चेतावनी देते हुये उन्होने कहा कि जिस प्रकार प्रदेश के किसान सभा नेता और खेत मजदूर यूनियन नेता कम्युनिस्ट पार्टी की रोटियाँ तोड़ रहे हैं वैसा ही ज़िले में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा भले ही ज़िले में ये संगठन बनें या न बनें। किन्तु उनके द्वारा महिला फेडरेशन के किए कार्यों का विशद गुण गान किया गया। उनके बाद बोलने आए इप्टा के राकेश जी व प्रलेस के शकील सिद्दीकी साहब उनके लंबे भाषण का ज़िक्र करना न भूले। अध्यक्ष मण्डल के सदस्य शिव प्रकाश तिवारी जी ने उनके विपरीत ज़िले से प्रत्याशी रहे दोनों युवा साथियों की भूरी-भूरी प्रशंसा की कि वे सुप्तप्राय पार्टी का झण्डा-बैनर लेकर जनता के बीच गए और उन दोनों ने पार्टी को पुनर्जीवित कर दिया। शिव प्रकाश जी ने किसान नेताओं की भी प्रशंसा करते हुये विशेष रूप से अतुल अंजान साहब के योगदान को याद दिलाया। जिला मंत्री की कमियों के बावजूद उनके धैर्य व संयम की भी शिव प्रकाश जी ने सराहना की। - See more at: http://krantiswar.blogspot.in/2014/11/blog-post_26.html#sthash.ddfr17lJ.dpuf
 पूर्व घोषणा के अनुसार विगत 23 नवंबर 2014 को भाकपा, लखनऊ का 22 वां ज़िला सम्मेलन आयोजित हुआ। प्रारम्भ में प्रदेश की ओर से पर्यवेक्षक महोदय ने इसका उदघाटन उद्बोद्धन दिया। अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय, प्रांतीय परिस्थितियों का सवा घंटे उल्लेख कर जब वह ज़िले की परिस्थितियों पर आए तो उनके असंतोष व आक्रोश का प्रस्फुटन हुआ।खुद बारह वर्ष लखनऊ के ज़िला सचिव व आठ वर्ष प्रदेश के सचिव रह चुके पर्यवेक्षक महोदय  जिलामंत्री जी से काफी खिन्न थे और उनकी सांगठानिक कार्य प्राणाली की तीखी भर्त्सना कर डाली। उनके द्वारा इंगित किया गया कि "यह ज़िला सम्मेलन बगैर शाखाओं व मध्यवर्ती कमेटियों के सम्मेलन करवाए हो रहा है। उनके द्वारा यह भी उद्घाटित किया गया कि वह लखनऊ के ही हैं और यहीं रहने के कारण यहाँ की हर गतिविधि से बखूबी वाकिफ भी हैं। इस क्रम में उनके द्वारा साफ शब्दों में कहा गया कि वह मलीहाबाद और लखनऊ पूर्व से रहे प्रत्याशियों से काफी असंतुष्ट हैं क्योंकि उन दोनों ने संगठन के विस्तार पर कोई ध्यान ही नहीं दिया है। अपने गुस्से को और आगे बढ़ाते हुये कठोर शब्दों में इन दोनों को चेतावनी देते हुये उन्होने कहा कि जिस प्रकार प्रदेश के किसान सभा नेता और खेत मजदूर यूनियन नेता कम्युनिस्ट पार्टी की रोटियाँ तोड़ रहे हैं वैसा ही ज़िले में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा भले ही ज़िले में ये संगठन बनें या न बनें। "
http://krantiswar.blogspot.in/2014/11/blog-post_26.html 
पूर्व घोषणा के अनुसार विगत 23 नवंबर 2014 को भाकपा, लखनऊ का 22 वां ज़िला सम्मेलन आयोजित हुआ। प्रारम्भ में प्रदेश की ओर से पर्यवेक्षक महोदय ने इसका उदघाटन उद्बोद्धन दिया। अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय, प्रांतीय परिस्थितियों का सवा घंटे उल्लेख कर जब वह ज़िले की परिस्थितियों पर आए तो उनके असंतोष व आक्रोश का प्रस्फुटन हुआ।खुद बारह वर्ष लखनऊ के ज़िला सचिव व आठ वर्ष प्रदेश के सचिव रह चुके पर्यवेक्षक महोदय  जिलामंत्री जी से काफी खिन्न थे और उनकी सांगठानिक कार्य प्राणाली की तीखी भर्त्सना कर डाली। उनके द्वारा इंगित किया गया कि यह ज़िला सम्मेलन बगैर शाखाओं व मध्यवर्ती कमेटियों के सम्मेलन करवाए हो रहा है। उनके द्वारा यह भी उद्घाटित किया गया कि वह लखनऊ के ही हैं और यहीं रहने के कारण यहाँ की हर गतिविधि से बखूबी वाकिफ भी हैं। इस क्रम में उनके द्वारा साफ शब्दों में कहा गया कि वह मलीहाबाद और लखनऊ पूर्व से रहे प्रत्याशियों से काफी असंतुष्ट हैं क्योंकि उन दोनों ने संगठन के विस्तार पर कोई ध्यान ही नहीं दिया है। अपने गुस्से को और आगे बढ़ाते हुये कठोर शब्दों में इन दोनों को चेतावनी देते हुये उन्होने कहा कि जिस प्रकार प्रदेश के किसान सभा नेता और खेत मजदूर यूनियन नेता कम्युनिस्ट पार्टी की रोटियाँ तोड़ रहे हैं वैसा ही ज़िले में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा भले ही ज़िले में ये संगठन बनें या न बनें। किन्तु उनके द्वारा महिला फेडरेशन के किए कार्यों का विशद गुण गान किया गया। उनके बाद बोलने आए इप्टा के राकेश जी व प्रलेस के शकील सिद्दीकी साहब उनके लंबे भाषण का ज़िक्र करना न भूले। अध्यक्ष मण्डल के सदस्य शिव प्रकाश तिवारी जी ने उनके विपरीत ज़िले से प्रत्याशी रहे दोनों युवा साथियों की भूरी-भूरी प्रशंसा की कि वे सुप्तप्राय पार्टी का झण्डा-बैनर लेकर जनता के बीच गए और उन दोनों ने पार्टी को पुनर्जीवित कर दिया। शिव प्रकाश जी ने किसान नेताओं की भी प्रशंसा करते हुये विशेष रूप से अतुल अंजान साहब के योगदान को याद दिलाया। जिला मंत्री की कमियों के बावजूद उनके धैर्य व संयम की भी शिव प्रकाश जी ने सराहना की। - See more at: http://krantiswar.blogspot.in/2014/11/blog-post_26.html#sthash.ddfr17lJ.dpuf
 व्यक्तिगत रूप से अपने बारे में वे लोग जानें किन्तु उनके बनवाए 75-80 पार्टी सदस्य अब उनके साथ ही जाएंगे यह निश्चित जानिए। जो लोग पैसा भी खर्च कर रहे थे और जिनके पास समर्थक भी थे उनको पार्टी छोडने पर मजबूर करके अशोक मिश्रा जी व ए के सेठ साहब ने पार्टी का किस प्रकार भला किया? ज़रा इस पर भी विचार होना चाहिए ही ।

Tuesday, 23 September 2014

लखनऊ पूर्व से भाकपा प्रत्याशी रहे कामरेड राजपाल द्वारा चुनाव समीक्षा

  लोकसभा और विधानसभा मतदाता सूचियों में अंतर एक साजिश
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Rajpal urf Raju Yadav <rajpal.raju0108@gmail.com>

9:45 AM
लखनऊ ,23 सितंबर 2014 । भाकपा के नगर सचिव और लखनऊ पूर्व से प्रत्याशी रहे कामरेड राजपाल उर्फ राजू यादव ने आज यहाँ एक बयान जारी करके यह रहस्योद्घाटन किया कि मई 2014 के लोकसभा चुनावों में अपने मताधिकार का प्रयोग कर चुके तमाम यादव मतदाताओं के नाम सितंबर 2014 में हुये विधानसभा चुनाव की मतदाता सूचियों से गायब पाये गए हैं। ये सभी यादव मतदाता किसके इशारे पर मतदान से वंचित किए गए हैं? राजपाल ने बताया कि यह बात जग ज़ाहिर है कि अखिलेश यादव जी के मुख्यमंत्री रहते उनके इशारे के बगैर उनके सजातीय यादव मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काटने का साहस सरकारी कर्मचारियों व अधिकारियों में हो ही नहीं सकता। अतः यह खेल प्रदेश सरकार की एक सोची समझी साजिश है जिसके जरिये भाजपा प्रत्याशी को आसान जीत दिलाई गई है। उन्होने जनता का आह्वान किया कि सपा-भाजपा की इस मिलीभगत की साजिश से सावधान रहे।

टंडन जी की जीत में मायावती जी का भी योगदान

टंडन जी की जीत में मायावती जी का भी योगदान

Rajpal urf Raju Yadav <rajpal.raju0108@gmail.com>

3:47 PM (18-09-2014 )
लखनऊ,17 सितंबर 2014, लखनऊ पूर्व से भाकपा प्रत्याशी रहे कामरेड राजपाल उर्फ राजू यादव ने आज यहाँ अपने फैजुल्लागंज स्थित निवास पर अपने सहयोगियों को धन्यवाद देने हेतु बुआई गई एक बैठक में बोलते हुये यह रहस्योद्घाटन भी किया कि चुनाव में जीत हासिल करने वाले आशुतोष टंडन जी के पिता श्री लालजी टंडन और मायावती जी के बीच बहन-भाई के पुराने रिश्ते हैं और वह उनको राखी भी बांधती रही हैं। इस चुनाव में मायावती जी ने अपने भतीजे आशुतोष टंडन जी को जितवाने के लिए अपने समर्थक लगभग बीस हज़ार वोट उनको ट्रांसफर करा दिये। इस कारवाई को छिपाए रखने के लिए एक निर्दलीय प्रत्याशी को समर्थन देने का झूठा स्वांग भी रच डाला। लेकिन कुल 27 हज़ार समर्थक वोटों में से उस निदलीय को केवल 7 हज़ार वोट मिलना यह साबित करता है कि बाकी वोट टंडन जी को पड़वाये गए थे।
राजपाल ने बताया कि आगामी चुनावों में हमें सपा-बसपा-भाजपा के मिले जुले खेल को अच्छी तरह समझते हुये चुनाव लड़ना होगा। उन्होने अपने सभी सहयोगियों के प्रति आभार जताया कि कठिन हालत के होते हुये भी उन्होने जी जान से इस चुनाव को लड़वाया और आगे भी सबसे सहयोग मिलने की उनको पूरी पूरी आशा है। सभी जनों ने उनको आश्वस्त किया कि वे अपना सहयोग पूर्व वत जारी रखेंगे।
राजपाल उर्फ राजू यादव
नगर सचिव ,भाकपा, लखनऊ
एवं पूर्व प्रत्याशी-लखनऊ पूर्व

 

 

सपा व भाजपा पर मिलीभगत का आरोप

:लखनऊ पूर्व से भाकपा प्रत्याशी रहे राजपाल उर्फ राजू यादव द्वारा सपा व भाजपा पर मिलीभगत का आरोप

Rajpal urf Raju Yadav <rajpal.raju0108@gmail.com>

3:25 PM (18-09-2014 )
लखनऊ,17 सितंबर 2014, आज यहाँ जारी एक बयान में लखनऊ पूर्व से भाकपा प्रत्याशी रहे कामरेड राजपाल उर्फ राजू यादव ने भाजपा और सपा में मिलीभगत होने का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि लोकसभा चुनावों के समय सपा ने भाजपा को जिताने में मदद की थी। अगर ऐसा न होता और मोदी लहर का कोई करिश्मा होता तो मुलायाम परिवार का एक भी सदस्य चुनाव क्यों नहीं हारा ?जबकि सभी को हारना चाहिए था। लेकिन भाजपा ने मुलायम परिवार के किसी भी सदस्य को नहीं हराया था जो उन दोनों में मिलीभगत होने का संकेत था। अब विधानसभा उप चुनावों में भाजपा ने उस एहसान का बदला चुकाने के लिए पूर्व में खुद जीती अपनी सीटें सपा को भेंट कर दी हैं। आदित्यनाथ का बयान भ्रामक है वह या उनकी पार्टी कोर्ट में जाकर उनकी सभाए होना सुनिश्चित कर सकती थी। लेकिन तय प्रोग्राम के अनुसार उनको सभी विधानसभा क्षेत्रों में नहीं भेजा गया था। लखनऊ गृहमंत्री राजनाथ सिंह जी का संसदीय क्षेत्र है और यह सीट उनको लालजी टंडन के स्थान पर मिली थी इसलिए वह टंडन जी के पुत्र को विधानसभा में भेजना चाहते थे। उनको मुलायम सिंह जी ने उसी तरह मदद की जैसी लोकसभा चुनावों में की थी। आशुतोष टंडन जी की यह जीत जनता के साथ सपा -भाजपा गठजोड़ द्वारा किया गया एक बहुत बड़ा धोखा है।
राजपाल उर्फ राजू यादव
नगर सचिव, भाकपा, लखनऊ
एवं पूर्व प्रत्याशी- लखनऊ पूर्व

भाकपा प्रत्याशी कामरेड राजपाल का संक्षिप्त परिचय



Rajpal urf Raju Yadav <rajpal.raju0108@gmail.com>

Sep 8 



173 लखनऊ पूर्व से भारतीय कम्युनिस्ट के प्रत्याशी 42 वर्षीय  कामरेड राजपाल उर्फ राजू यादव,नगर सचिव,भाकपा लगभग 22 वर्षों से छात्र व किसान आंदोलनों में संघर्ष रत  हैं। इनके पिताजी स्व.श्रीपाल यादव एक कर्तव्यनिष्ठ व ईमानदार किसान थे। उनसे ये गुण राजपाल जी को विरासत में मिले हैं। 

एक साक्षात्कार में उन्होने बताया कि उनका चुनाव लड़ने का उद्देश्य मात्र मेहनतकश मजदूर,पटरी दुकानदार,किसान व क्षेत्र के चौतरफा विकास जैसे-सड़क,नाली,सीवर,लाईट,विद्युत की कमी को दूर करने,बच्चों को अच्छी व सस्ती शिक्षा उपलब्ध कराने बेरोजगारों को रोजगार मुहैया कराने,महिलाओं को रक्षा व सुरक्षा दिलाने,पुलिस उत्पीड़न को रोकने तथा सत्ताधारी पार्टियों द्वारा समाज ,क्षेत्र व देश में भाई-चारे को खत्म करने की साजिश को विफल करना है क्योंकि सांप्रदायिकता से इंसानी जीवन को खतरा पैदा हो गया है। 

एक मात्र भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ही ऐसा राजनीतिक दल है जो इंसानी रिश्ते और भाई- चारे तथा देश के चौतरफा विकास पर विश्वास करता है। उनको पूरी उम्मीद है कि इस बार जनता उन्हें भारी मतों से विजयी बना कर विधासभा में भेजेगी जिससे उसकी आवाज़ बुलंदगी से शासकों के समक्ष उठाई जा सके। 

Saturday, 30 August 2014

हंसिया-बाली के चुनाव निशान के सामने वाला बटन दबायें!---डॉ गिरीश

उत्तर प्रदेश विधान सभा के उपचुनावों में प्रदेश के मतदाताओं से भाकपा की अपील
आपसी मेल-मिलाप बढ़ाने! महंगाई, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी पर लगाम लगाने! महिलाओं, कमजोर वर्गों पर अत्याचार रोके जाने तथा अपने विधान सभा क्षेत्र एवं जनपद के समग्र विकास के लिये!
हंसिया-बाली के चुनाव निशान के सामने वाला बटन दबायें! भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रत्याशियों को सफल बनायें!
उत्तर प्रदेश के मतदाता भाइयो और बहिनो!
अभी हाल ही में हुये लोकसभा के चुनावों में आप सभी ने बड़ी ही उम्मीद और आशा के साथ एक पार्टी को भारी बहुमत देकर केन्द्र की गद्दी पर पहुंचाया था. लेकिन इस सरकार को काम करते हुये अभी सौ दिन भी नहीं हुये हैं और इस सरकार से सभी को गहरी निराशा हाथ लगी है.
हमारी सीमाओं के पार से तड़-तड़ गोलियां चल रही हैं और सीमाओं के रक्षक हमारे जवान लगातार शहीद होरहे हैं. सत्ता में आने के बाद इस सरकार ने पिछली केन्द्र सरकार की नीतियों को और भी जोर-शोर से लागू किया है और डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस, रेल किराया और मालभाड़े की दरों में भारी बढ़ोत्तरी की है. इससे हर चीज की कीमतें आसमान छूरही हैं और महंगाई की मार से जनता त्राहि-त्राहि कर रही है. भ्रष्टाचार के खिलाफ बड-चड़ कर बातें करने वालों की यह सरकार अपने थोड़े समय के कार्य काल में ही तमाम आरोपों में घिरती जारही है. केन्द्र सरकार के पहले बजट ने ही विकास के इसके दाबों की कलई खोल कर रख दी. बेरोजगार नौजवानों, छात्रों, महिलाओं, किसानों, मजदूरों, दस्तकारों, दलितों, अल्पसंख्यकों और पिछड़ों सभी को इसने निराश किया है. जनता ने भाजपा को इस आशा से वोट दिये थे कि उनके अच्छे दिन आयेंगे, लेकिन आगये बेहद बुरे दिन. यह पार्टी और इसकी सरकार पूरी तरह पूंजीपतियों और कार्पोरेट घरानों के हित में काम कर रही है और आम जनता को तवाह कर रही है. इससे केन्द्र सरकार के प्रति जनता में गुस्सा पैदा होरहा है. जिसका प्रमाण है हाल ही में उत्तराखण्ड, बिहार, कर्नाटक, पंजाब, मध्य प्रदेश के उपचुनाव जहां भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिली. अब तो भाजपा की अंतर्कलह भी खुलकर सामने आगयी है. इस सबसे जनता का ध्यान बंटाने और उसे आपस में लड़ाने को भाजपा द्वारा तरह तरह के हथकंडे अपनाये जारहे हैं. सांप्रदायिकता को खास औजार बनाया जारहा है.
उत्तर प्रदेश की सरकार ने भी आम जनता को हर मोर्चे पर निराश किया है. हर तरह के अपराध बड रहे हैं. महिलाओं और यहां तक कि अबोध बालिकाओं के साथ दुराचार और उसके बाद उनकी हत्या आम बात होगयी है. हत्या, लूट, राहजनी आदि हर तरह के अपराध बड रहे हैं. सांप्रदायिक दंगों को काबू करने में सरकार की हीला हवाली साफ दिखाई देरही है. एक तिहाई उत्तर प्रदेश को बाढ़ ने तो शेष को भयंकर सूखे ने तवाह कर दिया है. सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है. पीड़ित किसानों ने आत्म हत्याएं करना शुरू कर दीं हैं. अभूतपूर्व बिजली संकट से हर कोई परेशान है. किसानों का चीनी मिलों पर करोड़ों रुपया बकाया है जिसे अदा नहीं कराया जारहा. डीजल आदि खेती के लिये जरूरी चीजों पर राज्य सरकार ने टैक्स बढ़ा दिया है. राशन प्रणाली में लूट मची है. बेरोजगारी से निपटने को कारगर कदम नहीं उठाये जारहे, शिक्षा को व्यापार बना डाला है. शिक्षा बेहद महंगी है अतएव आम बच्चे शिक्षा नहीं लेपारहे. बेकारी भत्ता और लैपटाप आदि भी देना बंद कर दिया गया है. इलाज भी आज बहुत ही महंगा होगया है. सडकों का बुरा हाल है. भ्रष्टाचार ने सभी को तवाह किया हुआ है और गुंडे अपराधी माफिया दलाल सभी खुशहाल हैं.
केंद्र और राज्य सरकार को अपने इन कदमों को पीछे खींचने को मजबूर करना होगा. इसके लिये संसद और विधान सभा के भीतर और बाहर संघर्ष करना होगा. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने आजादी की लड़ाई से लेकर आज तक किसानों, कामगारों और आम जनता के हित में लगातार आवाज उठाई. है. हमें गर्व है कि हम पर आजतक भ्रष्टाचार का कोई भी आरोप नहीं लगा. सांप्रदायिकता और जातिवाद जैसी बुराइयों से हम कोसों दूर हैं. महंगाई भ्रष्टाचार बेकारी और अशिक्षा को दूर करने को हम जुझारू आन्दोलन करते रहे हैं. जातिगत लैंगिक समानता और आपसी भाईचारे के लिये हम हमेशा प्रतिबद्ध रहे हैं. हमारी समझ है कि देश और समाज की आज की समस्यायों का निदान मौजूदा पूंजीवादी व्यवस्था में संभव नहीं है. आजादी को आये ६७ वर्ष बीत गये और हमारी समस्यायें जस की तस बनी हुयी हैं. इन समस्यायों का समाधान केवल समाजवादी व्यवस्था में ही संभव है और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी समाजवादी समाज का निर्माण करने को प्रतिबध्द है.
लेकिन ये चुनाव मध्यावधि चुनाव है. केन्द्र अथवा राज्य सरकार बनाने के लिये नहीं. अतएव इन चुनावों में आप भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रत्याशियों को अवश्य ही मौका दे सकते हैं. यदि आपके क्षेत्र से भाकपा प्रत्याशी विजयी होगा तो आपकी समस्याओं के समाधान तथा क्षेत्र के विकास के लिये निश्चय ही वह औरों से अधिक जोरदारी से आवाज बुलंद करेगा. वह हर वक्त आपकी सेवा और सहयोग के लिये आपके बीच रहेगा.
अपनी सीमित ताकत और सीमित साधनों के चलते प्रदेश में भाकपा ने केवल चार स्थानों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं. वे हैं – नोएडा से प्रोफेसर सदासिव चामर्थी, सिराथू से शिवसिंह यादव, हमीरपुर से श्यामबाबू तिवारी तथा लखनऊ पूर्व से राजपाल यादव.
अतएव आप सभी से विनम्र अनुरोध है कि आप १३ सितंबर को होने जा रहे विधानसभा के उपचुनावों में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रत्याशियों के चुनाव चिन्ह हंसिया और बाल के सामने वाला बटन दबा कर भारी बहुमत से सफल बनायें तथा भाकपा प्रत्याशियों एवं भाकपा उत्तर प्रदेश इकाई की तन मन धन से मदद करें.
निवेदक
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश राज्य काउन्सिल
२२, कैसरबाग, लखनऊ


साभार : 
https://www.facebook.com/dr.girishcpi/posts/272519279624114