गंभीर आरोपों पर चुप्पी क्यों? CPI (बिहार) में पारदर्शिता और जवाबदेही का बड़ा सवाल"
लाल सलाम साथियों!
मैं हूँ सुनिधि, और आप देख रहे हैं "राम या वाम"। यहाँ हम सत्ता से नहीं, सवालों से डरते हैं; व्यक्तियों से नहीं, तथ्यों से बात करते हैं। आज का सवाल है—क्या किसी भी संगठन की सबसे बड़ी ताकत उसकी पारदर्शिता और जवाबदेही नहीं होनी चाहिए?
आखिर सी पी आई, बिहार के राज्य सचिव कामरेड रामनरेश पांडेय का कौन सा गुप्त रहस्य मधुबनी जिला मंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय परिषद सदस्य कामरेड मिथिलेश झा और एक अन्य विवादास्पद महिला नेतृ कामरेड राजश्री किरण के पास है जिस आधार पर ये दोनों राज्य सचिव को आपने दबाव में ले रहे हैं?
कामरेड मिथिलेश झा और राजश्री किरण के खिलाफ ठगी,गबन और धोखाधड़ी के आरोप लगातार लग रहे हैं और साथ हीं साथ कईआडियो और एक साथी द्वारा शपथ-पत्र भी दिया गया जिसकी कापी राम या वाम पर भी उपलब्ध है । 2018 में मधुबनी में संपन्न पार्टी के राज्य सम्मेलन के अवसर पर कईयों व्यावसायी से लाखो रुपए रूपए का उधार लेकर न चुकाने के आरोप भी मिथिलेश झा पर आज भी लग रहे हैं।जिसका एक उदाहरण है उदय किराना स्टोर ,जिसके मालिक ने हाल ही लगभग दो महीना पूर्व राज्य सचिव को एक लाख सोलह हजार रुपए मिथिलेश झा द्वारा न चुकाए जाने की शिकायत , पत्र द्वारा की। जिसकी एक कापी शुद्धिकरण अभियान समिति के पास भी है । लेकिन राज्य सचिव उसे भी फाईल में दबाकर बैठे हैं जबकि मधुबनी राज्य सम्मेलन के एक आयोजनकर्ता खुद राज्य सचिव ही थे।इसलिए पार्टी की हो रही बदनामी से वह अपने को अलग नही कर सकते।
सबसे चिंताजनक पहलू यह कि मधुबनी जिला में बड़े पैमाने पर फर्जी पार्टी सदस्यता और पार्टी फंड की हेराफेरी का मामला प्रकाश में आ रहा है।इससे बड़ा फंड हेराफेरी का उदाहरण क्या होगा कि जिला पार्टी का बैंक एकाउंट नही होने की बात कही जा रही है।फर्जी पार्टी सदस्यता का आंखे खोल देने वाला उदाहरण ही है राज्य और केन्द्र की नवीकरण मद का लाखो रुपए की बकाया राशि।अगर नवीकरण सही हुआ है तो बकाया राशि कैसे?
पार्टी साथियों का आरोप है कि मिथिलेश झा लगभग ग्यारह वर्षों से मधुबनी जिला पार्टी के सचिव हैं।इस अवधि में नवीकरण में 40 प्रतिशत राशि जो जिला और निचली इकाई का हिस्सा है,मिथिलेश झा ने उस राशि का कभी हिसाब नही दिया।अगर सभी को जोड़ा जाए तो यह राशि 30 से 40 लाख रुपए होती है।अगर यह आरोप सच है तो फर्जी सदस्यता का यह भी एक अकाट्य उदाहरण है।
सामान्य परिस्थिति में एक कम्युनिस्ट पार्टी के भीतर ऐसे आरोपों के लगने के बाद बिना विलंब किए संबद्ध व्यक्ति का पार्टी से निष्कासन एक मात्र सजा है।लेकिन उल्टे कामरेड रामनरेश पांडेय और उनके कुछ गुर्गे मिथिलेश झा और राजश्री किरण के बचाव में बेतुका तर्क देते नजर आ रहे हैं।इसमें कथित बिहार पार्टी प्रभारी कामरेड गिरीश चन्द्र शर्मा भी शामिल हैं जो मिथिलेश झा के निर्दोष होने पर तर्क देते घूम रहे हैं।इसी से लगता है कि मिथिलेश झा और राजश्री किरण के हाथों कामरेड रामनरेश पांडेय ब्लैकमेल हो रहे हैं जो पार्टी के लिए अत्यधिक चिंताजनक है।
लाल सलाम
कम्यूनिस्ट पार्टी जिंदाबाद
शुद्धिकरण अभियान समिति जिंदाबाद
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