जब रोम जल रहा था, नीरो सुख और चैन की बाँसुरी बजा रहा था!
भाजपाई अश्लीलता का ताज़ातरीन प्रदर्शन : जनता सड़कों पर विरोध कर रही है और प्रधानसेवक 25 साल के "उपलब्धियों" के जश्न में मशगूल हैं।
रोम के क्रूर तानाशाह के बारे में प्रचलित यह कहावत आज हमारे देश के हालात पर बिल्कुल सटीक बैठती है। पूरे देश में आम जनता जब अपनी बुनियादी माँगों और अधिकारों की रक्षा के लिए सड़कों पर है, तब फ़ासीवादी शासक कभी अपना जन्मदिन मनाने में व्यस्त है, कभी भजन गाने में तल्लीन है, तो कभी अपने (कु)शासन की खुशियाँ मनाने में। सत्ताधारी महामानव के 25 साल के कार्यकाल पूरे होने के मौके पर केन्द्रीय कैबिनेट ने एक प्रस्ताव पारित किया। इसके तहत देशभर में भाजपा नरेन्द्र मोदी के 25 साल के राजनीतिक करियर का जश्न मनाने के लिये कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। 'सेवा संकल्प अभियान' के नाम से शुरू किये गये इन कार्यक्रमों में लोगों को "ईश्वरीय अवतार" के उपलब्धियों से परिचित कराने की पुरज़ोर कोशिश की जायेगी! एक बार फ़िर इसके लिए सरकारी आयोजन किये जायेंगे, जनता का हज़ारों करोड़ रुपये महामानव की छवि को बचाने की कोशिश में बहाया जायेगा। ख़ैर! इससे पहले कि हम भाजपा द्वारा आयोजित किये जा रहे इन कार्यक्रमों की मंशा पर सवाल करें, हमें फ़ासीवादी तानाशाह की "विराट छवि" को गढ़ने वाली उनकी उपलब्धियों को याद कर लेना चाहिए।
"हिन्दू हृदय सम्राट" के पिछले 25 साल की "अद्वितीय प्रतिभा" के कुछ चुनिन्दा उदाहरण :
गुजरात नरसंहार 2002
मुज्ज़फरनगर दंगे 2014
दिल्ली दंगे 2020
नोटबन्दी घोटाला
अनियोजित कोविड लॉकडाउन
पीएनबी घोटाला
पीएम केयर्स फण्ड का घोटाला
राफेल घोटाला
राम मन्दिर चन्दा चोरी घोटाला
सीबीएसई घोटाला
रिकॉर्डतोड़ परीक्षा घोटाला
पेट्रोल, डीज़ल, रसोई गैस व अन्य ज़रूरी उत्पादों की क़ीमत को आसमान तक ले जाना!
देश की लगभग आधी आबादी को बेरोज़गारी, अर्द्धबेरोज़गारी या प्रच्छन्न बेरोज़गारी की स्थिति में पहुँचाने की कला!
चार लेबर कोड लाकर मज़दूरों के शोषण और लूट को क़ानूनी जामा पहनाने में भरपूर योगदान!
वैश्विक भूखमरी और ग़रीबी सूचकांक में भारत को अव्वल स्थान पर लेकर जाना!
महिला असुरक्षा के मामले में भारत को सर्वोच्य स्थान दिलाना!
प्रेस स्वतन्त्रता के मामले में लगातार भारत का नीचे लुढ़कते जाना!
छात्रों युवाओं पर लठियाँ, गोलियाँ और पैलेट गन चलवाना!
साम्प्रदायिक हिंसा में अभूतपूर्व बढ़ोतरी का श्रेय!
इलेक्शन कमीशन से लेकर ईडी, सीबीआई व न्यायपालिका तक में फ़ासीवादी घुसपैठ के ज़रिये उनकी बर्बादी में योगदान!
SIR के ज़रिये चुनावी घपलेबाज़ी का कलात्मक प्रदर्शन
उपरोक्त चन्द घोटालो, घपलों, भाजपाई तरक्की और विकास का पूरा-पूरा श्रेय मोदी जी के महान नेतृत्व को जाता है। आम जनता को लाइनों में लगवाकर, उनके बचे-खुचे अधिकारों को छीनकर, देश को भूखमरी, बेरोज़गारी, ग़रीबी, महिला असुरक्षा में सबसे आगे पहुँचाकर उत्सव मनाने की जो नायाब कला है, उसकी प्रथम वाहवाही का हक़दार फ़ासिस्ट गिरोह के सरदार के अलावा भला और कौन हो सकता है! इसलिए, राजनीति में उसके 25 साल के नग्ण और बेशर्म प्रदर्शन पर यह संघी जश्न लाज़मी है। कोई भी आम इन्सान अगर इन कार्यक्रमों की ज़रूरत पर दो मिनट रुक कर सोचेगा, तो इसके पीछे की सच्चाई भी समझते देर नहीं लगेगी।
नरेन्द्र मोदी के 25 साल के राजनीतिक करियर में आम आवाम को क्या हासिल हुआ? "नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमन्त्री" के सिर्फ़ और सिर्फ़ 12 साल के कार्यकाल को भी देखें और तमाम चुनावी वायदों को याद करें तो शायद ही आप कोई ऐसा वायदा पूरा होते हुए ढूँढ पाये जो मेहनतकश जनता के हितों का साधन करता हो। आज जब एक बड़ी आबादी कमरतोड़ महँगाई, बेरोज़गारी, ग़रीबी की मार झेल रही है, छात्र-युवा बरबाद होती शिक्षा व परीक्षा व्यवस्था का नतीजा भुगत रहे हैं, देश के अल्पसंख्यक विशेष तौर पर मुसलमान साम्प्रदायिक तनाव और फ़ासीवादी हिंसा के शिकार बन रहे हैं, जब स्त्री-विरोधी व दलित-विरोधी अपराध अपने चरम पर हैं, जब देश के ग़रीब छोटे किसान हर रोज़ तबाह हो रहे हैं और आत्महत्याएँ कर रहे हैं, उस समय नरेन्द्र मोदी के 25 सालों पर मनाएँ जाने वाले ये उत्सवी कार्यक्रम जनता के दुख-तकलीफ़ों के साथ एक क्रूर मज़ाक है। भाजपा,आरएसएस के तमाम नेता इस मौक़े पर ख़ुद को परमभक्त साबित करने की प्रतिस्पर्द्धा में कहीं कीर्तन, कहीं जागरण करवा रहें हैं, तो कहीं नये सिरे से साम्प्रदायिकता के ज़हर को घोलने के काम में लग गये हैं। यह सब सिर्फ़ और सिर्फ़ इसलिए ताकि छात्र-युवा आन्दोलन के दौरान पूरी दुनिया में महामानव कि चूर-चूर हो चुकी छवि को फ़िर से जोड़ा और चमकाया जा सके। याद हो की परीक्षाओं में धाँधली के ख़िलाफ़ दो महीने पहले हुए छात्रों के आन्दोलन ने प्रधानसेवक की गढ़ी गयी छवि को अर्श से फर्श पर ला खड़ा किया था। इस नुक़सान की भरपाई के लिये अब नये सिरे से भव्य कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू किया जा रहा है।
फ़ासीवादी राजनीति कि यह विशेषता होती है की वह अपने शीर्ष नेता यानी "फ़्यूहरर" को शुद्ध रूप से तैयार किये गये विचारधारात्मक समुदाय के अकेले प्रवक्ता, एकमात्र नेता और हृदय सम्राट के रूप में स्थापित करता है और इसके लिए वह इन तमाम तरीकों का इस्तेमाल करता है, जिसका जनजीवन के असल सवालों से कोई लेना-देना नहीं होता। फ़ासीवादी नेता का कद इस कदर बड़ा बना दिया जाता है कि उसका विरोध असम्भव प्रतीत होने लगे, यहाँ तक कि उससे सवाल करना भी देश और राष्ट्रद्रोह की गिनती में ले आया जाता है। यही आज हमारे देश में मोदी नीत भाजपा सरकार के फ़ासीवादी शासन में हो रहा है।
25 साल सत्ता में रहना कोई उपलब्धि है या नहीं यह इस देश कि आम जनता तय करेगी और इस वक़्त भाजपा सरकार के प्रति जो असंतोष और गुस्सा लोगों में है वह सड़कों पर अभिव्यक्त हो रहा है। फ़ासीवादी तानाशाहों के लम्बे से लम्बे कार्यकाल को जनता ने कहाँ से कहाँ पहुँचा दिया है, इसका इतिहास गवाह है, जिसे मिटाया नहीं जा सकता। फ़ासीवादी प्रधानसेवक की चकनाचूर छवि को बचाने के लिए भाजपा-आरएसएस द्वारा मनाया जा रहा यह जश्न इनके राजनीतिक अश्लीलता की पराकाष्ठा है और आम जनता की समस्याओं को नज़रअन्दाज़ करने का बेशर्म उदाहरण भी है।
