Wednesday, 17 February 2016

यह स्थिति, आपने स्वयं उत्पन्न किया है. ...............................................Tarique Anwar Champarni

सच्चाई  का आईना  : 

Tarique Anwar Champarni
वामपंथी और बुद्धिजीवी बिलबिला रहे है. आखिर क्यो? कभी सोचा है. 

यह स्थिति, आपने स्वयं उत्पन्न किया है. आपकी बौद्धिकता और 

जनवादी सोच विश्वविधालय से जंतर-मंतर तक सिमट कर रह गयी. 

यह स्थिति इसलिए भी उत्पन्न हुई की बुद्धिजीवियों और आम जनता के 

बीच एक बड़ी दूर बनी रही. आप बड़ी-बड़ी बाते कर लेते है, अकैडमिक 

पेपर और पुस्तकें लिख लेते है मगर कोई एक ऐसा विकल्प लोगों के 

सामने प्रस्तुत नहीं किया जिसमे समस्या का समाधान मौजूद हो. 

मुसलमान, आदिवासी, दलित और शोषित समाज जनवादी आंदोलनों मे 

भीड़ मात्र बनकर खड़ा रहा और मलाई वही लोग खाते रहे जिनके विरुद्ध शोषित समाज को लड़ाई लड़नी थी. जिस भीड़ के लिए आप सत्ता की बात करते थे उस भीड़ को आपने मुख्य-धारा मे शामिल ही नहीं किया. वही आभिजात वर्ग काँग्रेस के साथ थे, वही आभिजात वर्ग का कब्ज़ा आरएसएस के ऊपर है और वही आभिजात वर्ग वामपंथियों के साथ है. सीधे शब्दों मे बोल दूँ तो जो ब्राह्मणवाद काँग्रेस मे था वही आरएसएस मे है और वही वामपंथ मे है. बौद्धिक विवेचना एक बात है और लोगों की आकांक्षाओं पर खड़ा उतरना दूसरी बात है. उदाहरण, मेरे एक प्रोफेसर पश्चिम बंगाल से है. वीरभूम-बोलपुर संसदीय क्षेत्र से सोमनाथ चटर्जी आठ बार सांसद बने है लेकिन मेरे प्रोफेसर ने बचपन से लेकर आजतक सोमनाथ दादा को अपनी आँखों से नहीं देखा. बंगाल से आपके क़िला के ढहने के कारणों को समझने के लिए यही एक उदाहरण काफी है. मै आपकी बौद्धिकता पर प्रश्न खड़ा नहीं कर रहा हूँ. आज यदि आपकी तड़प और बेचैनी को आम-जनता का सहयोग नहीं मिल रहा है तो इसमे अचरज की कोई बात नहीं है. खैर, जो भी हो पीएचडी तो जेएनयू से ही करना है.


मुझे कन्हैया कुमार को लेकर थोड़ी भी चिंता नहीं है, वह सप्ताह भर के भीतर रिहा हो जायेगा. रिहाई के बाद वामपंथ का बड़ा नेता भी बनेगा और पोलित-बेयूरों का प्रतिनिधित्व भी करेगा.Ameeque Jamei भाई जान, हमे चिंता तो आपकी है. लात, घुषा और मुक्का खाने के बाद भी आप तटस्थ है मगर अबतक किसी बड़े ब्राह्मणवादी वामपंथी नेताओं का आपके प्रति कोई ब्यान नहीं सुना. ............................... मै क्यों न समझूँ की वामपंथ ने भी आदिवासियों, दलितों, मुसलमानों और शोषितों को एक भीड़ के रूप मे ही इस्तेमाल किया है? खैर, जो भी हो पीएचडी तो जेएनयू से ही करना है................................

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Tuesday, 16 February 2016

पूंजीवाद- ब्राह्मणवाद गठजोड़ और वामपंथ की लापरवाही ------ विजय राजबली माथुर

जिस तरीके से जे एन यू छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया को षड्यंत्र पूर्वक गिरफ्तार किया गया और कोर्ट के बाहर कामरेड अमीक व उनके साथियों के साथ-साथ पत्रकारों पर केंद्र में सत्तारूढ़ दल के विधायक एवं हमदर्द वकीलों द्वारा आक्रमण किया गया है उसको देख कर अपने 1991 में लिखे तथा 2011 में ब्लाग पर प्रकाशित लेख के कुछ अंशों को यहाँ पुनः देना उचित समझ आ रहा है। 

Sunday, September 18, 2011


बामपंथी कैसे सांप्रदायिकता का संहार करेंगे? ------ विजय राजबली माथुर

लगभग 12 (अब  32)  वर्ष पूर्व सहारनपुर के 'नया जमाना'के संपादक स्व. कन्हैया लाल मिश्र 'प्रभाकर'ने अपने एक तार्किक लेख मे 1951  - 52 मे सम्पन्न संघ के एक नेता स्व .लिंमये के साथ अपनी वार्ता के हवाले से लिखा था कि,कम्युनिस्टों  और संघियों के बीच सत्ता की निर्णायक लड़ाई  दिल्ली की सड़कों पर लड़ी जाएगी।

आज संघ और उसके सहायक संगठनों ने सड़कों पर लड़ाई का बिगुल बजा दिया है,वामपंथी अभी तक कागजी तोपें दाग कर सांप्रदायिकता का मुक़ाबला कर रहे हैं;व्यापक जन-समर्थन और प्रचार के बगैर क्या वे संघियों के सांप्रदायिक राक्षस का संहार कर सकेंगे?....................
यहाँ का प्राचीन आर्ष धर्म हमें "अहिंसा परमों धर्मा : "और "वसुधेव कुटुम्बकम" का पाठ पढ़ाता रहा है। नौवीं सदी के आते-आते भारत के व्यापक और  सहिष्णु  स्वरूप  को आघात लग चुका था। यह वह समय था जब इस देश की धरती पर बनियों और ब्राह्मणों के दंगे हो रहे थे। ब्राह्मणों ने धर्म को संकुचित कर घोंघावादी बना दिया था । ....................
पूंजीवादी प्रेस वामपंथी सौहार्द के अभियान को वरीयता दे भी कैसे सकता है?उसका ध्येय तो व्यापारिक हितों की पूर्ती के लिए सांप्रदायिक शक्तियों को सबल बनाना है। अपने आदर्शों और सिद्धांतों के बावजूद वामपंथी अभियान अभी तक बहुमत का समर्थन नहीं प्राप्त कर सका है जबकि,सांप्रदायिक शक्तियाँ ,धन और साधनों की संपन्नता के कारण अलगाव वादी प्रवृतियों को फैलाने मे सफल रही हैं।

सड़कों पर दंगे :

अब सांप्रदायिक शक्तियाँ खुल कर सड़कों पर वैमनस्य फैला कर संघर्ष कराने मे कामयाब हो रही हैं। इससे सम्पूर्ण विकास कार्य ठप्प हो गया है,देश के सामने भीषण आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है । मंहगाई सुरसा की तरह बढ़ कर सांप्रदायिकता के पोषक पूंजीपति वर्ग का हित-साधन कर रही है। जमाखोरों,सटोरियों और कालाबाजारियों की पांचों उँगलियाँ घी मे हैं। अभी तक वामपंथी अभियान नक्कार खाने मे तूती की आवाज की तरह चल रहा है। वामपंथियों ने सड़कों पर निपटने के लिए कोई 'सांप्रदायिकता विरोधी दस्ता' गठित नहीं किया है। अधिकांश जनता अशिक्षित और पिछड़ी होने के कारण वामपंथियों के आदर्शवाद के मर्म को समझने मे असमर्थ है और उसे सांप्रदायिक शक्तियाँ उल्टे उस्तरे से मूंढ रही हैं।

दक्षिण पंथी तानाशाही का भय :.......................
वामपंथी असमर्थ :

वर्तमान परिस्थितियों का मुक़ाबला करने मे सम्पूर्ण वामपंथ पूरी तरह असमर्थ है। धन-शक्ति और जन-शक्ति दोनों ही का उसके पास आभाव है। यदि अविलंब सघन प्रचार और संपर्क के माध्यम से वामपंथ जन-शक्ति को अपने पीछे न खड़ा कर सका तो दिल्ली की सड़कों पर होने वाले निर्णायक युद्ध मे संघ से हार जाएगा जो देश और जनता के लिए दुखद होगा।







https://www.facebook.com/photo.php?fbid=952038724876702&set=a.687233804690530.1073741827.100002117493285&type=3







http://navbharattimes.indiatimes.com/metro/delhi/politics/bjp-mla-op-sharma-beats-up-an-unidentified-man-outside-delhis-court/articleshow/50995987.cms


https://www.facebook.com/permalink.php?story_fbid=946177428802001&id=100002292570804

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यही उनकी सच्चाई है और आज एक अकेला जनसंघ नहीं है उनके साथ। 1980 में इंदिराजी ने देवरस से हुये 1975 के पैकट के तहत समर्थन प्राप्त कर सत्ता वापिसी की और 1984 में राजीव जी को भी उनका समर्थन रहा था। आज उनके समर्थक सपा,बसपा और वामपंथ में भी घुस चुके हैं। सेना, पुलिस और खुफिया विभागों तथा ब्यूरो क्रेसी में भी घुसे हुये हैं। JNUSU अध्यक्ष ने अपने भाषण में 'ब्राह्मण वाद - पूंजीवाद ' गठजोड़ की आलोचना की है और ' जय भीम - लाल सलाम' की बात उठाई है। इसी कारण कामरेड कन्हैया को गलत फंसाया गया है।उन पर व D.Raja साहब की पुत्री पर उल्टा इल्ज़ाम ब्राह्मण वाद - पूंजीवाद गठजोड़ का ही परिणाम है। वामपंथ में घुसे ब्राह्मण और ब्राह्मण वाद के पोषकों पर भी निगरानी रखने की ज़रूरत है जो भीतर- भीतर गृह मंत्री के साथ हैं। ------
बर्द्धन जी पर ब्राह्मण वाद के प्रहार :
आदरणीय  कामरेड  बर्द्धन जी के जीवन काल में भी ये ही साम्राज्यवाद/अश्लीलता समर्थक ब्राह्मण कामरेड उन पर तथा कामरेड अतुल अंजान साहब पर अभद्र प्रहार करते थे जिस कारण उनको पार्टी से निष्कासित भी किया गया था किन्तु गलत तरीके से। अब बर्द्धन जी के न रहने पर भी यह उन पर आक्रमण करने से बाज़ नहीं आ रहे हैं। इन लोगों को उन्ही लोगों का समर्थन प्राप्त है जो यू पी में दो बार पार्टी विभाजन के उत्तरदाई हैं  और जो पिछड़े/दलित  कामरेड्स को दबा कर रखने के प्रयासों में रहते हैं। भाजपाई राज्यपाल,मंत्रियों व सांसदों से मधुर संबंध अपने निजी हित में बनाए रखते हैं। कानूनी और राजनीतिक लड़ाई कामरेड कन्हैया के हक में चलाने के साथ-साथ पूंजीवादी तत्वों से गठजोड़ किए आंतरिक ब्राह्मण कामरेड्स पर भी ध्यान दिये जाने की आज परम आवश्यकता है। 





https://www.facebook.com/photo.php?fbid=201122490084854&set=a.110660412464396.1073741825.100005613129764&type=3

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इसका अभिप्राय यह हुआ कि, गृहमंत्री ने प्रधानमंत्री की छवी बिगाड़ने के लिए गलत चाल चल कर उनके खिलाफ माहौल बनाने में अपनी अक्ल का इस्तेमाल किया। लेकिन वह भी तो जन-हितैषी नहीं हैं।



वामपंथ को भाजपा के आंतरिक विवाद पर नहीं बल्कि अपने आंतरिक ब्राह्मण कामरेड्स पर नज़र रखने की ज़रूरत है। 

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Sunday, 14 February 2016

‎Save India‬ ‪‎Support Kanniah‬ ‪‎Support JNU‬ ‪‎Save Democracy‬ ------ Sudhakar Reddy Suravaram








{psstD Raja, Central Secretariat Member of our party and his daughter Aparajita Raja who is a AISF JNU activist got threatening calls today saying they will be murderd for protesting. The below video shows that she did not raise any anti national slogans and she instead stood up to those inciting violence. In the next video it is seen how the issue has been manipulated.
Posted by Sudhakar Reddy Suravaram on Saturday, February 13, 2016

https://www.facebook.com/srsuravaram/videos/vb.100001331435946/966876506700055/?type=2&theater


I strongly condemn the arrest of JNU SU President Kanniah on false cases of sedation. It is political bankruptcy to target political opponents. As student union president Kanniah went to stop a group of miscreants who were shouting anti national slogans and control the situation from spiralling into violence. Three days later at the behest of Union Home Minister Rajnath Singh police arrested Kanniah on charges of sedation. Kanniah is from AISF which is the only student organisation to have participated in freedom struggle and those accusing him of sedation are open proponents of Nathuram Godse who murdered Mahatma Gandhi. Kanniah should be immediately released and the government should desist from such unconstitutional measures of political targeting. The real antinational miscreants should be brought to book. If the government continues to neglect its duty of arresting real antinational miscreants and continue political targeting we will organise nationwide protests exposing the government.

Saturday, 13 February 2016

CPI demands the immediate release of JNU Students Union President ------ Sudhakar Reddy Suravaram












Anti-national? Not my son, says mother


Kanhaiya Singh. Picture by Prem Singh
Patna, Feb. 12: Meena Devi (55) is in a state of shock. The anganwadi worker earning around Rs 4,000 a month firmly believes her son cannot do anything against the nation's interests.
Her son, Jawaharlal Nehru University Students' Union (JNUSU) president Kanhaiya Singh, was arrested in New Delhi today on charges of sedition. Kanhaiya is a resident of Bihat in Bihar's Begusarai district, around 120km east of Patna.
"Kanhaiya has been politically inclined from his school days, but he never says anything that goes against national interests," Meena Devi told The Telegraph by phone. "I am his mother and can vouch for it, irrespective of the charges levelled against my son."
The controversy surrounding Kanhaiya and some other JNU students erupted last week when he allegedly led a protest march on the university campus against the hanging of Afzal Guru (convicted in the December 2001 Parliament attack) and Maqbool Bhatt (JKLF founder who was hanged in 1984). Allegedly, the protesters also spoke in favour of the right to self-determination for the Kashmiri people.
On Friday, Union home minister Rajnath Singh issued a statement for action against anti-national elements, following which Delhi police swung into action and arrested Kanhaiya.
The boy has a modest background. His father Jaishankar Singh (60) is a farmer but paralysed and bed-ridden for the past two years. His mother shoulders the family's responsibility. Kanhaiya has two brothers. His eldest brother, Manikant Singh, works for a private firm in Guwahati, Assam, where he lives with his family.
Kanhaiya is the second child. He has enrolled for a PhD course at JNU. His youngest brother, Prince Singh, is pursuing an MPhil course, also at JNU.
Meena Devi said she received the news of Kanhaiya's arrest from her youngest son, who told her the police first took him to the police station for interrogation and then arrested him.
Meena Devi shared the news with her husband, who expressed shock.
She is proud of her son's academic achievements, besides pointing out that he was the second boy from Bihar, after the late Chandrashekhar Prasad of Siwan, to have become JNUSU president. Chandrashekhar, who went to become a leader of the CPI-ML (Liberation), was shot dead on March 31, 1997 in Siwan.
Kanhaiya did his schooling from a government school in Bihat and his Class X and XII from a school in Barauni. "He was good in studies," Meena said before snapping the phone line saying she was getting calls from New Delhi and wanted to keep her phone free for any news of her son.

http://www.telegraphindia.com/1160213/jsp/frontpage/story_69039.jsp#.Vr6ks_l97IW

Monday, 8 February 2016

वर्ग-संघर्ष की सैद्धांतिकी का ब्राह्मणवाद के कवच के रूप में इस्तेमाल ------ वीरेंद्र यादव

**कम्युनिस्टो के उस पारम्परिक बौद्धिक मानस को कैसे बदला जा सकता है जो वर्ग-शोषण की सैद्धांतिकी का तर्क देकर जाति-भेद और शोषण के प्रश्न को दृश्य-ओझल करता रहा है. मैंने साहित्य का सन्दर्भ देते हुए डॉ. रामविलास शर्मा और उनके अंध-अनुयायियों का जिक्र करते हुए बताया कि किस तरह कुछ लोग जाने -अनजाने पहले भी और आज भी वर्ग-संघर्ष की सैद्धांतिकी को ब्राह्मणवाद के कवच के रूप में इस्तेमाल करते रहे हैं.**
कल की शाम हम लखनऊ वालों के लिए यादगार शाम थी .मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नए महासचिव सीताराम येचुरी , शंकरदयाल तिवारी जन्मदिन समारोह के अवसर पर व्याख्यान और संवाद के लिए शहर में मौजूद थे. वर्तमान चुनौतियों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में वर्ग संघर्ष दो पैरों पर टिका है एक पैर सामाजिक शोषण और जाति-भेद पर तो दूसरा आर्थिक शोषण पर . जरूरत है कि गाँव के हर उस कुंवे पर लाल झंडा लहराने की जहाँ से दलितों को पानी लेने पर आज भी रोक है. आयोजन के बाद हम कुछ मित्रों को देर रात तक उनसे अन्तरंग संगत का जब दुर्लभ अवसर मिला तब इस मुद्दे पर उनसे खुलकर जो अनौपचारिक बात हुयी उससे मुद्दे और साफ़ हुए. मैंने उनसे कहा कि मार्क्सवादी पार्टी के नेतृत्व द्वारा जाति- आधारित भेद और शोषण को प्रभावी ढंग से संबोधित किये जाने की शुरुआत तो स्वागत योग्य है ,लेकिन कम्युनिस्टो के उस पारम्परिक बौद्धिक मानस को कैसे बदला जा सकता है जो वर्ग-शोषण की सैद्धांतिकी का तर्क देकर जाति-भेद और शोषण के प्रश्न को दृश्य-ओझल करता रहा है. मैंने साहित्य का सन्दर्भ देते हुए डॉ. रामविलास शर्मा और उनके अंध-अनुयायियों का जिक्र करते हुए बताया कि किस तरह कुछ लोग जाने -अनजाने पहले भी और आज भी वर्ग-संघर्ष की सैद्धांतिकी को ब्राह्मणवाद के कवच के रूप में इस्तेमाल करते रहे हैं. मैंने उन्हें यह भी बताया कि अब मार्क्सवादियों के एक तबके के बीच से यह सैद्धांतिकी गढ़ी जा रही है कि अब मुख्य संघर्ष दलितों और पिछड़ों के अस्मितावाद के बीच है अम्बेडकरवाद और ब्राह्मणवाद के बीच नहीं. आरएसएस तो पहले से ही हिंदुत्व की रक्षा के लिए दलितों और पिछड़ों के बीच खाई को गहरी करने की व्यूहरचना पर काम करही रहा है. सीताराम येचुरी ने इस पर आश्चर्य और अनभिज्ञता प्रकट करते हुए कहा कि यह कैसे हो सकता है कि ब्राह्मणवाद को प्रश्नांकित किये बिना दलित मुद्दे को संबोधित किया जा सके. पिछड़ों का दलित-विरोध या दलितों का भाजपा द्वारा अधिग्रहण ब्राह्मणवाद की जकडबंदी का ही परिणाम है. मैंने येचुरी जी से कहा कि इस समूचे विषय पर पार्टी को अपनी स्पष्ट वैचारिकी एक दस्तावेज़ के माध्यम से लानी चाहिए . उन्होंने इसकी जरूरत को स्वीकार करते हुए इसे करने का आश्वासन दिया. और भी बहुत सी चर्चाएँ हुईं जिनसे यह जरूर लगा कि येचुरी जी एक नई शुरुआत करना तो चाहते हैं . देखना है क्या, कुछ ,कितना हो पाता है !
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वीरेंद्र जी की पोस्ट  पर महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ 

Friday, 5 February 2016

देश की संसदीय व्यवस्था कम्युनिष्ट के बिना बंजर भूमि के सामान है- ----- कॉ.अनजान



भाकपा के नब्बे बषॅ एवं काॅ चन्द्रशेखर के शताब्बदी समारोह के समापन पर बिहट में सभा को सम्मबोधीत करते काॅ अतुल कुमार अंजान जी
Posted by Cpi Bachhwara on Friday, February 5, 2016
05-02-2016 

पूंजीवादी रथ को चकनाचूर करे  बगैर गरीबी मिटाना सम्भव नही देश की संसदीय व्यवस्था कम्युनिष्ट के बिना बंजर भूमि के सामान है- कॉ.अनजान




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